कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सरकार ने विदेशी वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। इस कदम को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉक्टर नफीस फैजी ने स्वागत योग्य बताया है।
डॉ. नफीस फैजी ने कहा कि इससे टीकाकरण का दायरा बढ़ेगा। महामारी पर नियंत्रण की दिशा में यह कारगर कदम साबित हो सकता है। टीकाकरण अभियान में आशा वर्कर और एएनएम कि ग्रामीण इलाकों तक पहुंचने में अहम भूमिका रही है। इस टीकाकरण में चेन का अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह विचारणीय बात है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण का दायरा बढ़ाकर जून-जुलाई तक स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में कर सकते हैं। अभी यह नहीं पता कि कोरोना के आंकड़ों का ग्राफ कितना ऊंचा जाएगा। लेकिन जब 70 फीसदी आबादी का टीकाकरण कर लेंगे, तब हमारे लिए राहत की बात हो सकती है। हार्ड इम्युनिटी विकसित करने के लिए 70 फीसदी आबादी का टीकाकरण आवश्यक है।
क्या पहली डोज लेने के बाद संक्रमण होने पर दूसरी डोज लगाई जाएगी?
डॉ. नफीस फैजी ने कहा कि किसी व्यक्ति ने अगर वैक्सीन की पहली डोज लगवाई है। इसके बाद अगर वह संक्रमित हो जाता है तो इससे उसके दूसरी डोज लगवाने के कार्यक्रम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उसके संक्रमण से मुक्त होने के बाद उसे दूसरी डोज लगाई जाएगी। शरीर में एंटी बॉडी बढ़ाए जाने की यह एक प्रक्रिया है। वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लेना समस्या का हल नहीं हो सकता है।
वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं?
डॉ. नफीस ने कहा कि दुनिया में कोई भी ऐसी वैक्सीन नहीं बनी है जो शत-प्रतिशत रोग से मुक्त होने की गारंटी लेती हो। अगर हम मीजल का उदाहरण लें तो इसकी दर भारत में 80 से 85 फ़ीसदी है। जबकि यह वैक्सीन बहुत पुरानी है। इसकी दर को 96 फीसदी तक ले जाने के लिए इसकी दो डोज की गई हैं। इसके अलावा हमें टीकाकरण को जनसंख्या के दायरे में देखना चाहिए। कितनी बड़ी जनसंख्या को हम टीका लगाने का का काम कर रहे हैं। महामारी से मुक्ति का साधन कुल आबादी का 70 फीसदी से अधिक टीकाकरण है।
अभी तक उपलब्ध वैक्सीन : कोवीशील्ड और कोवैक्सीन, इसमें से कोवैक्सीन का ट्रायल जेएन मेडिकल कॉलेज में भी चल रहा है, जिसके अब तक परिणाम बेहद सुखद रहे हैं।