दीनदयाल स्थित मंडलीय स्टोर में वैक्सीन रखते स्वास्थ्यकर्मी।
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पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय परिसर स्थित मंडलीय टीका स्टोर में आगरा से 37160 डोज (खुराक) टीका पहुंच गया है। यहां से हाथरस, कासगंज, एटा एवं अलीगढ़ में जिला कोल्ड चेन में भेजने का काम चल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आगरा में अलीगढ़ मंडल के चार जिलों के लिए 37160 डोज कोविशील्ड टीके (वैक्सीन) प्राप्त किए। यह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे द्वारा तैयार की गई है। इसमें से 16850 डोज अलीगढ़ की है। हाथरस के 7350, एटा के 6330 और कासगंज के 6630 डोज है। जेडी अलीगढ़ मंडल डॉ. वीके सिंह ने बताया कि कुल डोज की संख्या में 10 से भाग देने पर वैक्सीन (शीशी) की संख्या प्राप्त हो जाएगी। एक शीशी में 5 एमएल वैक्सीन है, जिसे 10 लोगों (प्वाइंट फाइव एमएल प्रत्येक व्यक्ति) को लगना है।
2 से 8 डिग्री तापमान में रखा गया है टीका
टीके को 2 से 8 डिग्री तापमान में रखा गया है। डॉ. वीके सिंह ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के बीच टीके को आगरा से अलीगढ़ लाया गया। टीके की सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी को तैनात किया गया है। मंडलीय एवं जिला कोल्ड चेन पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कोल्ड बॉक्स में रखकर टीकों को टीकाकरण केंद्र तक पहुंचाया जाएगा। इसमें 8 से 10 घंटे तक टीका सुरक्षित रखा जा सकता है। अभी मौसम भी अच्छा है।
टीका केंद्रों पर कैमरे की नजर
टीकाकरण केंद्र पर कैमरे की नजर रहेगी। तीन कमरे वाले स्वास्थ्य केंद्रों को ही टीकाकरण केंद्र बनाया गया है। एक कैमरे में बैठने का इंतजाम होगा। दूसरे कमरे में टीका लगाया जाएगा। तीसरे कमरे को निगरानी कक्ष बनाया गया है। टीकाकरण कक्ष को छोड़कर बाकी दोनों कमरे में सीसीटीवी लगे होंगे। टीका लगने के बाद लाभार्थी को निगरानी कक्ष में करीब 30 मिनट बैठना है। यह इंतजाम इसलिए किया गया है कि किसी तरह की दिक्कत होने पर तुरंत उपचार मिल सके। 28 दिन बाद दूसरा डोज लगेगा।
एक-एक टीका पर सरकार की नजर
टीकाकरण सरकार के नियंत्रण में है। सूची में शामिल लोगों को ही टीके लगेंगे। टीका लगने के पहले सुरक्षाकर्मी आईडी देखकर टीकाकरण केंद्र में प्रवेश कराएंगे। दूसरा व्यक्ति आईडी वेरीफाई करेगा। टीका लगने के पहले कार्ड भरा जाएगा और सभी सूचनाएं कोविन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। टीका लगने की सूचना भी पोर्टल पर तत्काल अपलोड करना है। सीसीटीवी भी पहचान एवं निगरानी के लिए रखे गए हैं। किसी तरह की गड़बड़ी होने पर बचने की गुंजाइश कम है।