कोल क्षेत्र के भाजपा विधायक अनिल पाराशर के कार्यालय प्रभारी वीरेंद्र सिंह के दत्तक पुत्र ललित ने शनिवार तड़के छर्रा अड्डा पुल से कुछ आगे ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। यह कदम उसने खुद के मोबाइल व ईमेल आईडी हैक होने से परेशान होने पर उठाया है। वह पिछले तीन दिन से मानसिक दबाव में था। अपने मित्रों परिचितों से भी इसकी चर्चा कर चुका था। उसकी जेब से दो पेज का सुसाइड नोट मिला है।
क्वार्सी की शिव लोक कॉलोनी के वीरेंद्र सिंह अनिल पाराशर के कार्यालय प्रभारी हैं। खुद की संतान न होने पर उन्होंने भटौला हरदुआगंज के अपने साले के पुत्र ललित (27) को बाल्यकाल में ही गोद ले लिया था। ललित उनके पास ही रहकर पला बढ़ा। स्नातक करने के बाद परिवार में उसकी शादी की बातचीत चलने लगी थी। शनिवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे ललित अपने शिव लोक कॉलोनी स्थित घर से पैदल पैदल छर्रा अड्डा पुल से कुछ आगे डोरी नगर के पास पहुंच गया। वहां उसने 4.18 बजे अप लाइन की वैशाली एक्सप्रेस के आगे कूदकर जान दे दी।
डोरी नगर रेलवे फाटक के गेटमैन ने इसकी सूचना गांधीपार्क पुलिस को दी। इस पर कुछ देर के लिए ट्रेन को भी रोका गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कपड़ों की तलाशी लेकर उसकी पहचान की। साथ में दो पेज का अंग्रेजी में लिखा सुसाइड नोट भी मिला। पहचान होने पर वीरेंद्र सिंह के साथ विधायक अनिल पाराशर आदि वहां पहुंच गए।
इंस्पेक्टर गांधीपार्क विजय सिंह के अनुसार युवक कुछ दिन से हैकिंग की वजह से परेशान था। यह बात सुसाइड नोट में भी स्पष्ट हुई है। परिजनों ने अभी तहरीर नहीं दी है। तहरीर मिलने पर जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इस बात से परेशान था युवक
परिजनों से पुलिस पूछताछ व सुसाइड नोट में उल्लेखित विवरण से स्पष्ट हुआ कि सात अप्रैल को अचानक से उसकी जीमेल आईडी का नाम बदल दिया गया और उसका अकाउंट भी हैक कर कोई अन्य व्यक्ति उसे ऑपरेट कर रहा था।
अलग-अलग मोबाइल नंबरों से उसके फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पासकी डाउनलोड की गईं, जिससे उसे अपनी निजी जानकारी लीक होने का डर सता रहा था। उसने अंदेशा जताया कि हैकर उसकी निजी सामग्री को सार्वजनिक कर सकता है। इसी डर व तनाव में तीन दिन से परेशान युवक ने यह कदम उठा लिया। सुसाइड नोट में उल्लेखित सात मोबाइल नंबर परिजनों ने गांधीपार्क पुलिस व साइबर थाना पुलिस को दिए हैं।
मित्र-परिचितों से मांगी मदद, नहीं मिली राहत
अनिल पाराशर ने बताया कि दो दिन पहले उसने उनके कार्यालय पर पहुंचकर काम करने वाले स्टाफ से इस हैकिंग के विषय में चर्चा की थी। अपने कुछ अन्य मित्रों को भी बताया था। काफी प्रयास के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। उसे सलाह दी गई थी कि वह साइबर सेल जाकर मदद ले। उससे पहले उसने यह कदम उठा लिया। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद उसका शव गांव भटौला ले जाया गया। विधायक सहित कई परिचित अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
मृतक ललित का फाइल फोटो।