खैर में मौजूद माइनर की हुई सफाई
- फोटो : सिंचाई विभाग
172 वर्ष पुरानी है ऊपरी गंगा नहर
437 किमी लंबी ऊपरी गंगा नहर का निर्माण सन 1854 में पूरा हुआ था। यह उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरती है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल में इंजीनियर सर प्रोबी थॉमस कॉटली के नेतृत्व में 16 अप्रैल 1842 को शुरू हुआ और अप्रैल 1854 में पूरा हुआ। यह उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित भीमगोड़ा बैराज से गंगा के दाहिने किनारे से निकलती है। उत्तराखंड में हरिद्वार और रुड़की से होते हुए यूपी में प्रवेश करती है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर से होते हुए अलीगढ़ पहुंचती है। यहां से दो भागों में बट जाती है।
अलीगढ़ से दो भाग बटती है
ऊपरी गंग नहर अलीगढ़ के अकराबाद ब्लॉक के नानऊ से दो भागों में बट जाती है। एक शाखा हाथरस, मथुरा और आगरा से हाेते हुए कानपुर जाती है, दूसरी शाखा इटावा और आसपास के क्षेत्रों में जाती है।
देश की दो सबसे पुरानी नहरें
- कल्लनाई नहर : यह कावेरी नदी पर स्थित दुनिया की सबसे पुरानी नहरों में से एक है। इसे दूसरी शताब्दी ईस्वी में चोल वंश के राजा करिकालन द्वारा बनवाया गया था। यह तमिलनाडु में सिंचाई का प्रमुख स्रोत है।
- पूर्वी यमुना नहर : यह सन 1830 में ब्रिटिश काल के दौरान बनाई गई थी। यह उत्तर भारत और यूपी की सबसे पुरानी आधुनिक नहरों में से एक है, जो सहारनपुर जिले में हथिनीकुंड बैराज से निकलती है।