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देश की तीसरी सबसे पुरानी नहर: खेतों को लहलहाने की तैयारी शुरू, अलीगढ़ के 132 रजबहा-माइनर को मिलेगा पानी

Thu, 18 Jun 2026 03:55 PM IST
Chaman Kumar Sharma आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

ऊपरी गंग नहर को ही अपर गंगा कैनाल कहा जाता है। इससे अलीगढ़ के 72 रजबहा और माइनर जुड़े हुए हैं, जिनमें इसका पानी पहुंचता है। मध्य गंगा नहर से 60 रजबहा और माइनर को पानी मिलता है। इस तरह से 132 रजबहा और माइनर तक पानी पहुंचाया जाता है।
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नानऊ से गुजरती अपर गंग नहर का ड्रोन कैमरे से लिया गया चित्र - फोटो : सिंचाई विभाग
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विस्तार
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खरीफ के सीजन में धान की फसल को पानी देने की तैयारी शुरू हो गई है। ऊपरी गंग नहर और मध्य गंगा नहर से जिले के 132 रजबहा और माइनरों को पानी दिया जाएगा। इस वक्त रजबहा और माइनरों की सफाई की जा रही है, ताकि हेड से टेल तक सभी किसानों को पानी मिल सके। ऊपरी गंग नहर मानव निर्मित देश की तीसरी सबसे पुरानी नहर है, जिसका निर्माण 1853 में हुआ था। यह अलीगढ़ की खेतों के लिए जीवनदायिनी के रूप में बहती है। 

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ऊपरी गंग नहर को ही अपर गंगा कैनाल कहा जाता है। इससे अलीगढ़ के 72 रजबहा और माइनर जुड़े हुए हैं, जिनमें इसका पानी पहुंचता है। मध्य गंगा नहर से 60 रजबहा और माइनर को पानी मिलता है। इस तरह से 132 रजबहा और माइनर तक पानी पहुंचाया जाता है। खरीफ के सीजन में सभी रजबहा और माइनर में पानी पहुंचाया जाता है, क्योंकि धान को सबसे अधिक पानी की जरूरत होती है। इसलिए 15 जून से 1.95 करोड़ की लागत से इनकी सफाई शुरू करा दी गई है। रबी के सीजन में सफाई अक्तूबर और नवंबर में होती है। 

खरीफ के सीजन में किसानों को भरपूर पानी देने के लिए रजबहा और माइनरों की सफाई कराई जा रही है। जल्द ही इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। -राजेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग।

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खैर में मौजूद माइनर की हुई सफाई - फोटो : सिंचाई विभाग
172 वर्ष पुरानी है ऊपरी गंगा नहर
437 किमी लंबी ऊपरी गंगा नहर का निर्माण सन 1854 में पूरा हुआ था। यह उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरती है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल में इंजीनियर सर प्रोबी थॉमस कॉटली के नेतृत्व में 16 अप्रैल 1842 को शुरू हुआ और अप्रैल 1854 में पूरा हुआ। यह उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित भीमगोड़ा बैराज से गंगा के दाहिने किनारे से निकलती है। उत्तराखंड में हरिद्वार और रुड़की से होते हुए यूपी में प्रवेश करती है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर से होते हुए अलीगढ़ पहुंचती है। यहां से दो भागों में बट जाती है। 

अलीगढ़ से दो भाग बटती है 
ऊपरी गंग नहर अलीगढ़ के अकराबाद ब्लॉक के नानऊ से दो भागों में बट जाती है। एक शाखा हाथरस, मथुरा और आगरा से हाेते हुए कानपुर जाती है, दूसरी शाखा इटावा और आसपास के क्षेत्रों में जाती है। 

देश की दो सबसे पुरानी नहरें
  • कल्लनाई नहर : यह कावेरी नदी पर स्थित दुनिया की सबसे पुरानी नहरों में से एक है। इसे दूसरी शताब्दी ईस्वी में चोल वंश के राजा करिकालन द्वारा बनवाया गया था। यह तमिलनाडु में सिंचाई का प्रमुख स्रोत है।
  • पूर्वी यमुना नहर : यह सन 1830 में ब्रिटिश काल के दौरान बनाई गई थी। यह उत्तर भारत और यूपी की सबसे पुरानी आधुनिक नहरों में से एक है, जो सहारनपुर जिले में हथिनीकुंड बैराज से निकलती है।
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