फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ः सियासी बिसात पर अंदरखाने चोट दे रहे बागी

विज्ञापन
विज्ञापन
मन में कसक है और छटपटाहट भी। हो भी क्यों न? इतने समय पार्टी से टिकट पाने के लिए जी तोड़ मेहनत की। समर्थकों की टीम बनाकर क्षेत्र में खूब प्रचार प्रसार किया। मगर ऐन वक्त पर टिकट किसी और को मिल गया। अब टिकट न मिलने पर कहने को सभी अपने-अपने दल के चुनाव चिह्न और अपनी-अपनी पार्टी को जिताने के दावे करते फिर रहे हैं। मगर सच क्या है ये उनकी बातों में साफ झलक जाता है। कुछ इसी तरह के बागियों से परेशान हैं इन दिनों अधिकांश दावेदार। इन बागियों की संख्या भाजपा व सपा में ज्यादा है। जिले की दो सीटें ऐसी हैं, जिनमें से एक सत्ता व सिस्टम से तंग आकर और दूसरा टिकट न मिलने से आहत होकर बागी के रूप में खुलकर मैदान में है। अब इन ‘बागियों’ की मेहनत क्या रंग लाएगी, ये आने वाला वक्त बताएगा?
विज्ञापन

एक दुर्घटना ने बना दिया भाजपा का बागी
शहर सीट से विनोद कुमार निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। 2010 से कुछ समय पहले तक ये भाजपा का झंडा उठाकर घूमते थे। खटीकान चौराहा मंदिर वाला चौक देहली गेट के रहने वाले पेशे से अधिवक्ता विनोद का दर्द सत्ता, संगठन और सिस्टम से तंग आकर चुनाव मैदान में उतरने का है। दो वर्ष पूर्व उनके घर में हुए विस्फोट की घटना में जख्मी बहन के उपचार में मदद न मिल पाना इस दर्द का कारण बना। खुद संगठन से जुड़े होते हुए और पार्टी की प्रधानमंत्री जनकल्याण कारी योजना प्रचार-प्रसार विभाग की अधिवक्ता शाखा के अध्यक्ष रहते हुए भी वे पार्टी के विधायक-सांसदों और नेताओं के दर पर दस्तक देते रहे। अलीगढ़ से दिल्ली व लखनऊ तक सिस्टम से खूब जूझे। मगर मदद कहीं से नहीं मिली तो हो गए बागी और चुनाव मैदान में कूद पड़े। विनोद कहते हैं कि उद्देश्य किसी को हराना या जीतना नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाना और खुद मुकाम बनाना है। पहला चुनाव निर्दल (स्वराज भारतीय न्याय पार्टी के बैनरतलते) लड़ रहा हूं। पहला प्रयास है। कभी न कभी तो मुकाम हासिल होगा।
टिकट न मिलने की नाराजगी से कांग्रेस से बागी हुए
वर्ष 1997 से कांग्रेस में सक्रिय तुर्कमान गेट के रहने वाले एमएल पापा टिकट न मिलने से खफा हैं। वे कहते हैं कि लगातार कई बार से वे इगलास आरक्षित सीट से टिकट मांग रहे हैं। मगर उन्हें व उनके समाज को पार्टी के स्तर से लगातार उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। इसी वजह से नाराज होकर पार्टी के खिलाफ बागी के रूप में कोल से चुनाव मैदान में निर्दल उतरा हूं। अब इसका परिणाम जो भी हो, इस बात की कोई चिंता नहीं है। कहते हैं कि कम से कम अपने समर्थकों व शुभचिंतकों को मुंह दिखाने लायक तो रहूंगा।
विज्ञापन

बरौली के बागी का तो पर्चा ही रद्द हुआ
बरौली से भाजपा का टिकट मांग रहे हेमवंत चौहान बागी होकर राजा भैय्या की पार्टी में गए। उनका नामांकन रद्द होने के बाद वे आज भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब उनकी सक्रियता क्या गुल खिलाएगी, ये आने वाला वक्त बताएगा।
अंदरखाने वालों का नहीं हो रहा कोई समाधान
भाजपा, सपा, कांग्रेस व रालोद भितरघातियों से बेहद परेशान है। भाजपा में सर्वाधिक दावेदार शहर व कोल सीट पर थे। इसी तरह बरौली व छर्रा पर भी कुछ प्रमुख नाम थे। कहने को अब सभी चुनाव प्रचार में जुटे हैं। अपनी पार्टी को जिताने का दावा कर रहे हैं। मगर उनके चेहरों का हाल या उनकी कसक साफ देखने को मिलती है। कमोबेश यही हालात सपा के हैं। सबसे ज्यादा दावेदार वाली कोल व छर्रा सीट पर इनमें से कुछ ही चेहरे सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उनकी भी सक्रियता क्या गुल खिलाएगी, ये आने वाला वक्त बताएगा। कांग्रेस में भी ऐसे कई चेहरे हैं। इसी तरह रालोद का भी इगलास व खैर पर हाल है।
- जो कांग्रेस का नहीं हो सकता, वो बागी क्या कहलाएगा। एमएल पापा का निष्कासन नामांकन भरने के साथ ही हो गया। बाकी जो नाराज हैं, उन्हें मना लिया गया है। किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। - ठा.संतोष सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
-चुनावी रणनीति से चुनाव जीता जाएगा। कोई भी बागी नहीं हैं और न ही कोई असंतुष्ट है। जो भी असंतुष्ट थे, उन्हें मना लिया गया है। अब वह पार्टी के प्रत्याशी के साथ हैं। कोई अंतर्कलह नहीं है।
- चौधरी कालीचन सिंह, जिलाध्यक्ष रालोद
- सपा-रालोद के प्रत्याशियों की ऐतिहासिक जीत होगी। बागी कोई नहीं है। जो असंतुष्ट थे, उन्हें मना लिया गया है। वह पार्टी प्रत्याशी के साथ जगह-जगह प्रचार कर रहे हैं।
- गिरीश यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
- जो लोग भी टिकट मांगे थे, जिनको नहीं मिला है। उन सभी से बात चल रही है। कोई असंतुष्टि नहीं दिखाई दे रही है। सभी संतुष्ट हैं। फिर भी पार्टी सभी पर नजर बनाए हुए है।-चौ.ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें