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UP: उपचुनाव में जाटों को कौन साध सकेगा अबकी बार? इस वजह से बढ़ी भाजपा की टेंशन; सपा इसलिए है उत्साहित

Tue, 16 Jul 2024 09:25 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

लोकसभा चुनाव में खैर विधानसभा सीट पर इस बार जाटों को कौन साधेगा, यह देखने वाली बात होगी। चौ.चरण सिंह के प्रभाव वाले जाटलैंड में लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रति जाटों की नाराजगी रही। कमजोर प्रदर्शन बन रहा भाजपा के लिए चिंता का विषय है।
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UP By-election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अलीगढ़ जिले का जाटलैंड कही जाने वाली खैर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तैयारी हो रही है। हर दल अपने-अपने स्तर से प्रयासरत हैं। सभी के सामने सवाल है कि अबकी बार इस सीट पर बहुसंख्यक जाटों को कौन साधेगा। भाजपा तीसरी बार फिर जीत के लिए प्रयासरत है। लोकसभा के परिणामों को देखकर सपा भी उत्साहित है। अब परिणाम क्या होगा? यह तो आने वाला समय बताएगा। मगर सभी दलों और टिकट के दावेदारों ने अपने-अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।
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खैर में लगातार 45 साल तक रहे जाट विधायक
आजादी के बाद 1957 में अस्तित्व में आई टप्पल और अब खैर विधानसभा सीट पर जाट बहुल होने के कारण चौधरियों का कब्जा रहा है। इसी वजह से इसे जिले का दूसरा जाटलैंड कहा जाता है। सबसे पहले बसपा के सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले ने चौधराहट पर ब्रेक लगाया और 2002 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े ब्राह्मण नेता प्रमोद गौड़ ने जीत दर्ज की। 

2007 में रालोद के चौ. सत्यपाल सिंह के सामने वह चुनाव हार गए। इसके बाद अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित हो गई। इतिहास पर गौर करें तो खैर, चंडौस, टप्पल व जवां का इलाका एक विधानसभा का हिस्सा था और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहनलाल गौतम यहां से विधायक थे। 1957 में इसे अलग टप्पल सीट का दर्जा मिला और टप्पल क्षेत्र के गांव मालव के रहने वाले कांग्रेस नेता चौ. देवदत्त सिंह पहले विधायक बने।
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पार्टी संग अपनी छवि पर जीतते रहे यहां विधायक
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि इस सीट पर जाटों के बीच चौ. चरण सिंह का बड़ा प्रभाव रहा। इस वजह से शुरुआत में कांग्रेस, फिर बीकेडी, जेएनपी और हाल के दिनों में रालोद के विधायक रहे। मगर, यहां पार्टी के साथ-साथ निजी व्यवहार, संबंध और लोगों के बीच गहरी पैठ रखने वाले नेता विधायक बने हैं। मतलब लोगों के बीच जिसके बेहतर रिश्ते, उसका वर्चस्व रहा है।

प्यारेलाल, जगवीर सिंह और अनूप प्रधान बने दोबारा विधायक
इस सीट पर 1974 व 1977 में चौ. प्यारेलाल व 1985 व 1989 में जगवीर सिंह ही दोबारा विधायक बने हैं। इनके अलावा, भाजपा के अनूप प्रधान 2017 व 2022 में यहां से विधायक चुने गए।

ये है इतिहास
- 1952 में कांग्रेस से मोहनलाल गौतम (टप्पल, खैर, चंडौस, जवां संयुक्त विधानसभा क्षेत्र)
- 1957 में कांग्रेस से चौ. देवदत्त सिंह (टप्पल विधानसभा क्षेत्र बना)
- 1962 में निर्दलीय चौ. महेंद्र सिंह
- 1967 में कांग्रेस से चौ. प्यारेलाल (खैर विधानसभा क्षेत्र बना)
- 1969 में भारतीय क्रांति दल से चौ. महेंद्र सिंह
- 1974 में कांग्रेस से चौ. प्यारेलाल
- 1977 में जेएनपी से चौ. प्यारेलाल
- 1980 में कांग्रेस से चौ. शिवराज सिंह
- 1985 में लोकदल से चौ. जगवीर सिंह
- 1989 में जनता दल से चौ. जगवीर सिंह
- 1991 में बीजेपी से चौ. महेंद्र सिंह
- 1993 में जनता दल से चौ. जगवीर सिंह
- 1996 में भाजपा से ज्ञानवती सिंह पुत्री चौ. चरण सिंह
- 2002 में बसपा से प्रमोद गौड़
- 2007 में रालोद से चौ. सत्यपाल सिंह
- 2012 में रालोद से भगवती प्रसाद सूर्यवंशी
- 2017 में भाजपा से अनूप प्रधान
- 2022 में भाजपा से अनूप प्रधान

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में उपचुनाव पर भी फोकस
लखनऊ में रविवार को भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथा, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद रहे। इस बैठक में जिले से सांसद व विधायक सहित जनप्रतिनिधि, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और जिला व महानगर अध्यक्ष मौजूद रहे।
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इस दौरान लोकसभा चुनाव परिणाम को लेकर बिना किसी घबराहट के आने वाले चुनावों की तैयारी में जुटने का आह्वान किया गया। मंडल स्तर तक कार्यसमिति की बैठक का लक्ष्य रखा गया। उप चुनाव की तैयारियों में सभी से जुटने के लिए कहा गया। किसी भी कीमत पर सीट चाहिए। इसी प्रयास में काम करना है। 
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