ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मुहम्मद वली रहमानी ने कहा कि वह औरतों को समान अवसर देने के विरोधी नहीं है बल्कि आजादी के नाम पर बेलगामी एवं अश्लीलता का विरोधी हैं।
मौलाना रहमानी रविवार को एएमयू में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एवं सर सैयद अवेयरनेस फोरम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सेमिनार मेेें बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि औरतों की आजादी के नाम पर नए तरीके की गुलामी राइज की जा रही है। तहजीब के नाम पर मर्द बंद गले के कोट पहनने लगे और औरतों के कपड़े कम हो रहे हैं। यह इस्लामी तहजीब नहीं है। हमारी तहजीब नहीं कहती कि बेटी, बहू लिवास से अलग होकर एक नई दुनिया बसाए।
मौलाना रहमानी ने एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप पर इशारे-इशारे में कहा कि नई सरकार कोर्ट की बारीकियों में उलझाने का प्रयास कर रही हैं। हक के लिए लड़ने की जरूरत है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को आईआईटी, यूपीएससी, मेडिकल और सीए आदि परीक्षा में शामिल होने वाले एएमयू के छात्रों को उनकी तैयारी के लिये अपने पूरे सहयोग का आश्वासन दिया। एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने बड़े ही शालीन अंदाज में महिलाओं के हक की वकालत की।
उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म महिलाओं को तलाक संबंधित अति महत्वपूर्ण खुला (संबंध विच्छेद) का अधिकार देता है। लेकिन भारत में यह अभी अधिक प्रचालित नहीं है। उन्होंने महिलाओं से संबंधित तीन तलाक एवं अन्य मसलों पर पुनर्विचार करने की वकालत की। वीसी ने कहा कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों की खातिर विवाह के लिए इस्लाम धर्म ग्रहण कर लेते है, जिसको हतोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए धर्म गुरुओं को उचित कदम उठाना चाहिए।
कार्यक्रम को लॉ बोर्ड के सेक्रेटरी मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, लॉ बोर्ड के सदस्य प्रो. शकील समदानी ने भी संबोधित किया। प्रो. सऊद आलम कासमी, उबैद इकबाल आसिम, सबीहा सीमी शाह, प्रो. तारिक मंसूर, प्रो. नफीस अंसारी, मंसूर इलाही आदि मौजूद थे।