पूर्व सभासद गीता देवी, अंशु भारद्वाज, नितिन भारद्वाज, राजू प्रधान, मुकेश लोधी आदि दुकानदार एटा सांसद राजवीर सिंह भी मिले और मदद की गुहार लगाई। दुकानदारों का कहना है कि नगर पालिका ने जो नियम शर्तें दीं उनका पालन करते हुए प्रीमियम जमा कर दुकानें आवंटित कराई थीं और उनमें व्यापार शुरू किया। 10 से 12 वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद दुकानदारों ने कारोबार जमाया। ज्यादातर व्यापारियों की आय का जरिया इन्हीं दुकानों से है और परिवार पल रहा है। नगर पालिका ने यदि किसी नियम शर्त की गलती की तो इसमें उनका क्या दोष है।
व्यापर ठप हो जाने की स्थिति में कई परिवार बर्बादी के कगार पर और भूखों मरने की नौवत तक आ जाएगी। दुकानदार रो रहे हैं कि भले ही प्रशासन ने आदेश दिया हो तब भी अपने हाथों से भी अपना करोबार बंद नहीं कर सकते और प्रशासन जबरन दुकानें खाली कराएगा तो भी रोजी रोटी हाथ से जाएगी आखिर वो करें तो करें क्या? इसे लेकर वह जगह जगह मदद की गुहार लगा रहे हैं। हालांकि इस प्रकरण को दुकानदारों ने हाईकोर्ट में भी रिट दायर कर दी है जिस पर सोमवार को सुनवाई हो सकती है।
दुकान खाली करने की सूचना पर एक की हालत बिगड़ी
इन 32 दुकानों में बुक सेलर, परचून, कंप्यूटर रिपेयरिंग्र कॉस्मेटिक, शादी कार्ड्स, साइबर कैफे, डिश टीवी, ग्राहक सेवा केंद्र, मिनी बैंक, किराना आदि कारोबार संचालित हैं। दुकानें खाली कराने की सूचना से कई दुकानदारों की तो भूख गायब है जो खाना भी नहीं खा पा रहे। साइबर कैफे संचालक हिमांशु की इस बात को लेकर रविवार को तबियत भी खराब हो गई उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।