विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के जवाब से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह की परेशानी बढ़ सकती है।
यूजीसी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में साफ है कि यूजीसी अधिनियम 2010 को एएमयू द्वारा स्वीकार, अंगीकार एवं लागू कर दिया गया है। यह भी कहा गया है कि यूजीसी अधिनियम सभी विश्वविद्यालयों के लिए बाध्यकारी है।
एएमयू के पूर्व छात्र सैयद अबरार हसन ने एएमयू वीसी जमीरउद्दीन शाह की योग्यता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यूजीसी अधिनियम 2010 का हवाला देते हुए चुनौती दी थी कि केंद्रीय विश्वविद्यालय में कुलपति बनने के लिए प्रोफेसर का10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सैयद अबरार हसन इस केस को हार गए थे।
उसके बाद वे सुप्रीम कोर्टचले गए। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल कृष्ण ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर एवं न्यायमूर्ति यूयू ललित की बेंच में इस मामले की सुनवाई 4 अप्रैल को है। इस केस में यूजीसी भी एक पार्टी है। उसने दाखिल किए जवाब में स्पष्ट किया है कि एएमयू यूजीसी अधिनियम 2010 को स्वीकार एवं लागू कर चुका है। यह भी कहा गया है कि यह अधिनियम सभी विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य एवं बाध्यकारी है।
उल्लेखनीय है कि एएमयू द्वारा 6 दिसंबर 2010 को यूजीसी अधिनियम 2010 स्वीकार लिया गया था। उसके कुछ महीने बाद एक नोटिस के माध्यम से यूजीसी अधिनियम 2010 के क्लाज 7.3.0 को स्थगित कर दिया गया था। क्लाज 7.3.0 में ही कुलपति की योग्यता निर्धारित की गई है, जिसमें कहा गया है कि कुलपति बनने के लिए 10 वर्ष का प्रोफेसर का अनुभव अनिवार्य है।