बीएड में प्रवेश के नाम पर ठगी का शिकार हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंडल गोरखपुर के 36 छात्रों की दो वर्ष की मेहनत बेकार गई। उनके साथ ठगी करने वाले ने 6.37 लाख रुपये हजम कर लिए और कॉलेज ने भी अंतिम समय में तब सूचना दी, जब प्रवेश पत्र दिए जाने थे। इस मामले में प्रथम दृष्टया कॉलेज की लापरवाही उजागर हो रही है। जब इन छात्रों के लिए यह कॉलेज काउंसिलिंग के बाद आवंटित हुआ तो फिर अंत समय पर ही फीस जमा न होने की सूचना क्यों दी। अगर पहले से छात्रों को सूचना मिली होती तो शायद ये कुछ करते और प्रवेश पत्र पाकर परीक्षा भी दे सकते थे।
छात्रों के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2021-22 की बीएड प्रवेश परीक्षा दी। परीक्षा पास होने के बाद उन्हें अंजू प्रियंका डिग्री कॉलेज आवंटित हुआ। वे यहां आने की तैयारी करते। इसी बीच संत कबीर नगर के चपरा पूर्वी का अभिषेक संपर्क में आया। उसने बताया कि वह पहले से इस कॉलेज में द्वितीय वर्ष का छात्र है। वह इनकी फीस जमा करा देगा। इस पर गोरखपुर मंडल के 36 छात्रों ने अभिषेक के जरिये फीस दी। इनमें गोरखपुर के मुन्ना यादव ने 22 हजार, अब्दुल हादि से 17 हजार, कुशी नगर के दीपक कुमार ने 17 हजार, गोरखपुर के रंजीत कुमार ने 35 हजार, महाराजगंज के अंकुर ने 16 हजार, गोरखपुर के अजीत चौधरी ने 29 हजार व भरत पटेल ने 19 हजार रुपये दिए। रुपये लेकर अभिषेक ने इन्हें प्रवेश मिलने संबंधी कुछ दस्तावेज भी दिए। गोरखपुर से दूरी के चलते ये छात्र कभी कॉलेज नहीं आए और अपनी तैयारी करते रहे।
अब प्रथम वर्ष की परीक्षा शनिवार से शुरू होने की खबर मिली। इस पर पिछले दिनों इन छात्रों ने प्रवेश संबंधी दस्तावेजों पर अंकित कॉलेज के नंबर पर संपर्क किया तो पता चला कि इनकी फीस जमा ही नहीं हुई। इसके बाद कॉलेज से भी इनके पास फोन पहुंचने लगे। बाद में अभिषेक से संपर्क किया तो वह झूठ बोलने लगा। कुल मिलाकर शनिवार को वे इस मंशा से यहां पहुंचे कि प्रवेश पत्र लेकर परीक्षा देंगे। मगर कॉलेज ने इन्हें वापस कर दिया। इसके बाद शाम को विश्वविद्यालय प्रशासन के पास पहुंचे तो वहां से भी मदद नहीं मिली। तब विश्वविद्यालय के स्थायी कार्यालय के सामने थाना देखकर उसमें घुस गए। इसी दौरान पूर्व विधायक जमीर उल्लाह भी उनकी मदद को आ गए। यहां सभी छात्र रुपया वापसी पर सहमत हो गए। चूंकि, अभिषेक इनके क्षेत्र का है। इसलिए वह इनके साथ वहां जाकर रुपये देने को तैयार हो गए। सभी लोग आम्रपाली व वैशाली एक्सप्रेस से चले गए। इस दौरान छात्रों की दलील थी कि अपने घर जाकर वे इससे रुपये वसूल लेेंगे।
कुलपति का नोटिस क्यों नहीं हुआ लागू
इस मामले में राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय कुलपति के उस नोटिस पर सवाल खड़ा हो रहा है, जिसमें कुल सचिव महेश कुमार की ओर से ये कहा गया है कि किसी भी छात्र को फीस जमा न होने की मजबूरी में परीक्षा से वंचित नहीं रखा जाएगा।
समझौते में अभिषेक ने स्वीकारी ये रकम
अभिषेक द्वारा सिविल लाइंस में लिखित समझौते में स्वीकारा है कि उसने छात्रों से जो रकम ली है, उसमें से 85 हजार रुपये कॉलेज के खाते में, 3.75 लाख रुपये संतकबीर नगर के ही अपने परिचित रामसेवक के खाते में और 1.45 लाख रुपये रामसेवक के कहने पर सतीश वर्मा के खाते में डाली है, जबकि शेष 32250 रुपये अपने पास रखे हैं। इस तरह उसने 6.37 लाख 250 रुपये उसने इन छात्रों से लिए हैं, जिसे वह गोरखपुर जाकर इनको वापस करने के लिए तैयार है।
- हमारा इसमें क्या दोष है। हमारा दो वर्ष बेकार हो गया। अब रुपये वापस लेने के अलावा कोई चारा नहीं है। - दीपक कुमार, कुशीनगर
- कॉलेज स्तर से हमें आगाह किया गया था। मगर हमें ऐसी उम्मीद न थी कि प्रवेश पत्र नहीं दिया जाएगा। - रंजीत गोरखपुर
- पिछले काफी समय से अभिषेक हमसे झूठ बोलता रहा। उसी ने कहा था कि आप लोग आओ। प्रवेश पत्र मिलेगा। - भरत पटेल, गोरखपुर
- हमें चूंकि यह लगा कि अब परीक्षा नहीं दे सकते। इसलिए सभी से सहमति के बाद रुपये वापसी पर तैयार हो गए। अब वहां रुपये वसूलेंगे।-मुन्ना यादव, गोरखपुर