एएमयू दो ‘शाहों’ के बीच में है। एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बृहस्पतिवार को एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा था कि एएमयू को अल्पसंख्यक स्वरूप का दर्जा हासिल नहीं है।
उनकी पार्टी एएमयू में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग को आरक्षण दिलाएंगी। वहीं दूसरी तरफ एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह कहते है कि एएमयू का स्वरूप अल्पसंख्यक था, है और इंशा अल्लाह रहेगा। सुप्रीम कोर्ट में उनकी जीत होगी। अमित शाह के ताजा बयान के बाद एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप का मामला एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है। कुछ लोग इसे राजनीति से जोड़कर देख रहे है। यह भी सुझाव दे रहे है कि कुलपति को राजनेताओं के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में यूपीए सरकार का हलफनामा बदलकर केंद्र सरकार ने साबित कर दिया है कि उसकी मंशा क्या है।
उल्लेखनीय है कि 21 जनवरी को जब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अलीगढ़ आई थी, उस समय उन्होंने एएमयू पर चुप्पी साधी रही। बातचीत के लिए एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया एवं सांसद सतीश गौतम को अधिकृत कर चली गई। भाजपा नेताओं ने उस दिन भी स्पष्ट कर दिया था कि एएमयू को अल्पसंख्यक स्वरूप का दर्जा हासिल नहीं है। इसके साथ ही यह भी कहा था कि एएमयू में दलित एवं पिछड़ों को आरक्षण दिलाएंगे।