खबर पर एसओ दादों वहां पहुंच गए। उन्होंने किसी तरह स्थिति को नियंत्रण में किया। मगर आंबेडकर अनुयायियों ने पार्क को चारों ओर से घेर लिया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। जानकारी पर एसपी देहात, सीओ छर्रा, सीओ अतरौली सहित आधा दर्जन थानों के प्रभारी भी पहुंच गए। पुलिस ग्रामीणों को पार्क के आसपास से हटाने का प्रयास करती रही। लेकिन, ग्रामीण कुछ दूरी पर जमा हो गए। जब-जब पुलिस ने प्रतिमा हटाने के प्रयास किए, टकराव के हालात बन गए। कई बार पुलिस को भीड़ को दौड़ाना पड़ा। पुलिस की वीडियो बना रहे एक युवक को हिरासत में भी ले लिया।
एसएसपी ने दिखाया शासनादेश, तब माने ग्रामीण
करीब सवा ग्यारह बजे एसएसपी संजीव सुमन वहां पहुंच गए। उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता कर प्रतिमा समर्थक पक्ष से बातचीत कर उन्हें समझाया। साथ में शासनादेश की प्रति दिखाते हुए उन्हें बताया कि बिना अनुमति इस तरह प्रतिमा लगाने पर मुकदमा व कार्रवाई होगी। करीब आधा घंटे की बातचीत के बाद ग्रामीण माने। करीब 12:30 बजे प्रतिमा को वहां से हटाकर ग्राम प्रधान शारदा देवी के घर में रखवाया गया। एसएसपी ने गांव में पैदल मार्च कर शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की और लोगों को समझाया।
प्रधान पति राजाबाबू ने बताया कि कुछ शरारती तत्वों ने पार्क में प्रतिमा की स्थापना कर दी। वह उस समय गांव से बाहर थे। गांव के बाहर बघेल समाज व प्रतिमा समर्थक पक्ष के लोगों में मामूली झगड़ा हुआ था। अब प्रतिमा को पार्क से हटवा कर अपने घर रखवा लिया है। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष से यह पक्ष प्रतिमा लगाने के लिए प्रयासरत था।
रोरावर के बाद दूसरी घटना, जारी की गाइडलाइन
रोरावर के भीमपुर इब्राहिमपुर के बाद यह दूसरी घटना है। जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। इसे पंचायत चुनाव से जुड़ी खुराफात मानकर देखा जा रहा है। इसे लेकर गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें साफ कहा है कि बिना अनुमति कहीं भी किसी महापुरुष की प्रतिमा नहीं लगेगी। कोई ऐसा करना चाहता है तो उसे पहले डीएम के समक्ष आवेदन देना होगा। डीएम स्तर से सत्यापन सहित गृह विभाग को संस्तुति भेजी जाएगी। कोई संगठन या संस्था आवेदन कर रहा है तो उसे निकाय के प्रस्ताव की प्रति देनी होगी। इस पर रिपोर्ट डीएम-एसएसपी स्तर से भेजी जाएगी। तभी शासन से अनुमति के बाद प्रतिमा लग सकेगी।