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मेडिकल कॉलेज में जो दो मरे वह निगेटिव थे : एएमयू प्रशासन

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कोरोना वायरस संक्रमण के दो पॉजिटिव मामले मिलने के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज में कई तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। स्थिति को स्पष्ट करने के लिए अमर उजाला ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग के एमआईसी प्रोफेसर शाफे किदवई से विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस तरह की बातें फैल रही हैं कि पिछले दिनों जेएन मेडिकल कॉलेज में शहरी क्षेत्र के जिन दो लोगों की मौत हुई, उनकी डेड बॉडी को वैसे ही सील किया गया है, जैसा कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत होने के बाद किया जाता है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. शाहिद सिद्दीकी ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि प्रत्येक डेड बॉडी को सील करने का निर्धारित तरीका है। जिन डेड बॉडी के संबंध में ये बात कही जा रही है, उनका टेस्ट नेगेटिव था।
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इसके अलावा शहर में दो पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं, उनमें से एक की मौत हो चुकी है, यह बात भी पूरी तरह गलत है। वह मरीज अभी भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। उन्होंने कहा कि जहां तक कोरोना संदिग्ध मामलों को दबाने छुपाने के आरोपों का सवाल है तो आरोप कोई भी लगा सकता है। लेकिन यह समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि एकजुटता के साथ काम करने का है। यह भी कहा जा रहा है कि अलीगढ़ के 850 सैंपल जांच के लिए 15 दिनों से पेंडिंग हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों के सैंपल की जांच की जा रही है, यह आरोप भी पूरी तरह गलत है। अलीगढ़ के सैंपल प्राथमिकता पर जांचे जा रहे हैं। मेडिकली यह संभव नहीं है कि किसी भी सैंपल को रोका जाए। कोई भी सैंपल 24 घंटे से ज्यादा नहीं रह सकता। इसलिए उसकी जांच भी इसी समय सीमा में होनी चाहिए, इसके बाद वह सैंपल उपयोगी नहीं है।
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