भूपेंद्र सिंह मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके पास एक बेटी, एक बेटा था। बेटी की पांच साल पहले शादी कर दी। इकलौता बेटा आयुष पिता का कामकाज में हाथ बंटाता था, जिसे हादसे ने छीन लिया।
खुशियां मातम में बदलीं
आयुष का गभाना क्षेत्र से ही 22 जून की शाम रोका हुआ था। परिवार में खुशी का माहौल था। शादी की तीन जुलाई भी नियत हो गई थी। रोका के चंद घंटों बाद ही खुशियां मातम में बदल गई। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है।