पानी पूरी वाले ने खोला पूरा भेद
इस प्रकरण में जांच करते हुए पुलिस रकम ट्रांसफर होने वाले खाते के स्वामी अकराबाद कस्बे के पानी पूरी विक्रेता पीयूष तक पहुंची। उसने पूरी बात बताई कि वह तो पानी पूरी बेचता है। उसने बताया कि पिछले दिनों वह कस्बे के बालाजी जनसेवा केंद्र पर उद्यम सर्टिफिकेट बनवाने गया था। तब वहां उसने सभी दस्तावेज केंद्र संचालक प्रशांत को दिए थे। अंगूठे का निशान भी लगवाया। जब उसे बताया कि उद्यम पंजीकरण में अंगूठा नहीं लगाया जाता। तब उसे अंदेशा हुआ कि उन्होंने उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यह ठगी की है। इस पर पुलिस प्रशांत तक पहुंची। साथ में उसके साथी करहला अकराबाद के पवन को भी दबोच लिया गया।
दोनों ने ठगी करना स्वीकारा
पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर जब पूछताछ की तो उजागर हुआ कि प्रशांत व पवन ने मिलकर पानी पूरी विक्रेता पीयूष के दस्तावेजों से किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर लिंक कर एनएसडीएल बैंक में खाता खोला था। वह खाता पीयूष के ही नाम से खुला था। उसी खाते में ठगी की रकम मंगाई गई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें खाता खोलने के लिए मोबाइल नंबर केलनपुर का सचिन उर्फ सुमित मुहैया करता है। पुलिस दबिश में वह फरार हो गया। इन दोनों के पास से दो लेपटॉप, चार बायोमैट्रिक मशीन, तीन मोबाइल फोन, एक कूटरचित आधार कार्ड व एक फर्जी पेन कार्ड बरामद किया गया।
छह अन्य खाते भी खोले, जिनमें मंगाए ढाई लाख
इन दोनों से पूछताछ में अभी इतना पता चला है कि इन्होंने पीयूष के दस्तावेजों के अलावा छह अन्य लोगों के दस्तावेजों से खाते खोले हैं। इनमें करीब ढाई लाख रुपये ठगी की रकम मंगाई गई है। इन सभी छह खाता नंबरों पर भी एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज है। पुलिस अब इनके लैपटॉप की मदद से अन्य ठगी के राज तलाश रही है।