थाना क्वार्सी क्षेत्र में ढाई साल के दो बच्चों का अपहरण करके उनको नि:संतान दंपती को बेचने के मामले का पुलिस ने मंगलवार को खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने बच्चे अपहरण करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही बच्चे खरीदने वाले दो परिवारों में से एक महिला और एक पुरुष को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन लोगों ने बच्चों का अपहरण किया, उनमें से एक बच्चे का सगा बहनोई है। पीड़ित परिवार भी मजदूरी आदि का काम करते हैं।
मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित सभागार में एसपी सिटी कुलदीप गुणावत ने बताया थाना क्वार्सी के मोहल्ला मौलाना आजाद नगर से पांच अक्टूबर 2020 को ढाई साल का अयान पुत्र आस मोहम्मद निवासी गली नंबर 5, मौलाना आजाद नगर घर के बाहर खेलते हुए अचानक गायब हो गया था। 6 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज कराया गया। 11 मार्च 2021 को मौलाना आजाद नगर से ही ढाई साल का एक और बच्चा शोएब पुत्र जलालुद्दीन भी गायब हो गया। जलालुद्दीन एएमयू में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। उसके संबंध में भी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इन दोनों ही मामलों में एक ही स्थान, एक ही उम्र और घटना का एक ही तरीका होने पर पुलिस को कुछ शक हुआ।
पुलिस ने मोहल्ले के बच्चों से पूछताछ की। मोहल्ले के बच्चों ने बताया कि शोएब को 2 दिन पहले उसका सगा बहनोई शेर मोहम्मद गोद में खिला रहा था। इसके बाद से ही वह गायब है। शेर मोहम्मद पुत्र अली शेर, निवासी मौलाना आजाद नगर गली नंबर 2, जलालुद्दीन का सगा दामाद है। इसके बाद पुलिस ने शेर मोहम्मद को रडार पर ले लिया।
यह वही शेर मोहम्मद था, जो बच्चा गायब होने के बाद पुलिस के साथ उसकी तलाश करवाने में जुटा था। रविवार को कुछ साक्ष्यों के साथ पुलिस ने शेर मोहम्मद को हिरासत में ले लिया। पहले तो शेर मोहम्मद ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन जब पुलिस ने सख्ती के साथ पूछताछ की तो उसने कबूल कर लिया कि उसी ने बच्चे को अगवा करके अपने साथी शाहरुख की मदद से बेच दिया है। शेर मोहम्मद ने कबूल किया कि उसने मूल रूप से बिजनौर के रहने वाले और मौजूदा समय में दिल्ली के बाबरपुर में रह रहे फल व्यापारी उस्मान और उसकी पत्नी रुखसाना को बच्चा बेच दिया है। शोएब को 60 हजार रुपये में बेचा गया था।
इसके बाद पुलिस ने शेर मोहम्मद से अक्टूबर में गायब अयान के संबंध में पूछताछ की। इस पर भी शेर मोहम्मद ने पहले आनाकानी की लेकिन बाद में कबूल कर लिया कि अयान को उसने मुरादाबाद के कस्बा ठाकुरद्वारा में रहने वाले मुर्गा व्यापारी एहसान और उसकी पत्नी रेशमा को 70 हजार रुपये में बेच दिया है।
मामला खुल जाने के बाद पुलिस ने ठाकुरद्वारा और दिल्ली के बाबरपुर में दबिश दी। शुएब के मामले में पुलिस ने रुखसाना को और अयान के मामले में एहसान को गिरफ्तार किया है। बच्चा खरीदने वाले दोनों ही दंपती नि:संतान हैं। इस मौके पर सीओ अनिल समानिया मौजूद रहे, जबकि खुलासे में क्वार्सी इंस्पेक्टर छोटेलाल, एसआई अंकित कुमार आदि की मुख्य भूमिका रही है।
इस तरह तैयार हुई बच्चों को अगवा करने की जमीन
अलीगढ़। बच्चों को अगवा करने के मामले में गिरफ्तार किए गए शाहरुख पुत्र अली शेर निवासी 25 फीट रोड, मौलाना आजाद नगर, गली नंबर 2 की बहन दिल्ली में एक अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। इसी अस्पताल में उस्मान की पत्नी रुखसाना और एहसान की पत्नी रेशमा संतान के न होने पर अपने उपचार के संबंध में जाया करती थीं। रुखसाना और रेशमा दोनों आपस में सगी बहनें हैं। उनकी मुलाकात अस्पताल में काम करने वाली शाहरुख की बहन से हो गई। शाहरुख की बहन ने दोनों बहनों के नि:संतान होने का फायदा उठाते हुए कहा कि उसका भाई शाहरुख अलीगढ़ में एनजीओ चलाता है, जो अनाथ बच्चों की परवरिश करती है। वहां से वह दोनों बहनों को एक-एक बच्चा दिला सकती है। रेशमा और रुखसाना ने बात का भरोसा कर लिया। इसके बाद शाहरुख ने अयान की फोटो सबसे पहले मोबाइल से भेज दी। कहा कि बच्चा गोद लेने के कागज भरने होंगे, औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद आरोपी शेर मोहम्मद उर्फ छोटू ने अयान का अपहरण किया और उसको 60 हजार रुपये में बेच दिया। मार्च में इसी तरह शोएब का अपहरण किया गया और उसको बेच दिया गया।
एनजीओ चलाने वाली महिला के साथ रहता शाहरुख
पुलिस जांच में पता चला कि शाहरुख यहां विक्रम कालोनी में एनजीओ व डांस क्लास चलाने वाली महिला के संपर्क में रहता है। लॉकडाउन में महिला ने खाना आदि वितरित किया तो वह उनकी मदद में रहता था। शेर मोहम्मद को वह अपने साथ उनके घर ले जाता था। मगर, शेर मोहम्मद को यह कहकर बाहर रखता था कि उनको भी बच्चे बेचने के बदले रुपये देने होते हैं। वे सबके सामने नहीं लेंगी। इधर, जब फल विक्रेता को बच्चा यह कहकर दिया कि गोदनामा एनजीओ से हुआ है और वहां से अभी कागज बाद में मिलेंगे। इस पर फल विक्रेता ने उसे दो पेटी सेब एनजीओ में बच्चों को खिलाने के लिए दिए थे। यह सेब वह एनजीओ संचालिका के पास लाकर बेच गया था। मगर आज तक गोदनामे के कागज फल विक्रेता को नहीं पहुंचाए और वे भी बच्चा मिलने के कारण बाद में सब भूल गए।
खरीदने वाली महिला को ही बच्चा समझ रहा था असली मां
अलीगढ़। जब ढाई साल के अयान को उसकी वास्तविक मां को क्वार्सी थाने में सौंपा गया तो बच्चा रोने लगा। वह रेशमा को ही अपनी असली मां समझ रहा था। छह महीने में रेशमा के साथ इतना सहज हो गया था कि वह उससे अलग होते ही रोने लग जाता। थाना क्वार्सी के अंदर यह दृश्य देखकर बच्चे की वास्तविक मां करिश्मा और उसको खरीदने वाली रेशमा दोनों रोने लगीं। जब दोनों महिलाएं और बच्चे को रोता हुआ देखा तो थाने में मौजूद महिला सिपाही भी रोने लगीं। ऐसा हृदय विदारक दृश्य देखकर थाने में मौजूद अन्य स्टाफ की आंखें भी नम हो गई। थाने में मौजूद अन्य मामलों में आए फरियादी भी यह देखकर स्वयं को न रोक सके। कुछ ही देर में थाने में ऐसा दृश्य हो गया कि वहां पर मौजूद सभी लोगों की आंखों में आंसू थे।
बच्चों को खतरा अपने आसपास के लोगों से ज्यादा
अलीगढ़। थाना क्वार्सी के प्रभारी इंस्पेक्टर छोटेलाल कहते हैं कि मौलाना आजाद नगर की इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित किया है कि बच्चों को खतरा अपने आसपास के लोगों से ही अधिक है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वह छोटे बच्चों को अपनी निगरानी में रखें। चाहे कोई कितना भी नजदीकी हो, उस पर आंख बंद कर कर विश्वास न करें। बच्चों की सुरक्षा को स्वयं की जिम्मेदारी समझें।
आरोपी नहीं करते हैं कोई स्थायी रोजगार
अलीगढ़। बच्चों के अपहरण की घटना में शामिल आरोपी शेर मोहम्मद कोई स्थायी काम नहीं करता है। वह इधर उधर भटकता रहता है। उसके पिता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में खाने की रसोई में काम करते हैं। यही स्थिति दूसरे आरोपी शाहरुख की भी है।
अयान अपनी मां करिश्मा की गोद में।- फोटो : CITY OFFICE
शुहेब अपने पिता जमालुद्दीन के साथ।- फोटो : CITY OFFICE