जेएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने ढाई वर्ष के रय्यान की दुर्लभ सर्जरी को अंजाम दिया। संवाद
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जेएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने ढाई साल के बच्चे का दुर्लभ ऑपरेशन करने में सफलता पाई है। उसकी रीढ़ में ट्यूमर था। ट्यूमर का संक्रमण गले की नस तक फैल पहुंच गया था, जिससे रक्त का प्रवाह रुक गया था। करीब पांच घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद ट्यूमर को हटा दिया गया है। अब बच्चे की हालत ठीक है।
मुरादाबाद निवासी ढाई साल के बच्चे रय्यान के दोनों पैरों में छह महीने से कमजोरी थी। उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, एमआरआई में पता चला कि बच्चे की रीढ़ में बड़ा ट्यूमर है। न्यूरो सर्जरी विभाग में चिकित्सक डॉ. अहमद अंसारी ने बताया कि ऑपरेशन में लगभग पांच घंटे लगे, क्योंकि ट्यूमर रीढ़ की हड्डी और पांच वर्टिबरल सेगमेंट वाली नसों पर दबाव डाल रहा था। कार्डियोथोरेसिक विभाग के सर्जन प्रो. मोहम्मद आजम हसीन ने बताया कि शरीर की सबसे बड़ी नस को बंद करने वाले ट्यूमर को निकालने के लिए छाती के बाएं हिस्से को खोला गया।
न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमन मोहन शर्मा ने बताया कि इतने छोटे बच्चे में लगभग 15-20 सेमी के बड़े ट्यूमर का ऑपरेशन करने के लिए बहुत अधिक कौशल और टीम प्रबंधन की आवश्यकता होती है। प्रो. शहला हलीम व डॉ. अल्ताफ रहमान हैदर ने बच्चे को एनेस्थीसिया दिया। न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एम. फखरुल हुदा ने कहा कि जेएनएमसी में अधिक जटिल न्यूरो सर्जिकल मामले किए जा रहे हैं। इस विशेष मामले में टीम भावना की आवश्यकता थी।
डॉ. ताबिश खान ने कहा कि बच्चों में बेहतर परिणाम के लिए उत्कृष्ट शल्य चिकित्सा कौशल के साथ-साथ पोस्ट-ऑपरेटिव अवधि में गहन चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। जेएन मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य प्रो. राकेश भार्गव ने इस सफल सर्जरी के लिए न्यूरो सर्जन और कार्डियोथोरेसिक सर्जन की टीम को बधाई दी है।