पुलिस ने मामले में ट्यूशन शिक्षक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। एडीजे फास्ट ट्रैक द्वितीय राघवेंद्र मणि की अदालत ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर मारपीट, धमकी देने व किशोर न्याय अधिनियम के तहत दोषी ट्यूशन शिक्षक को सजा सुनाई गई है। हमले की धारा में उसे दोषमुक्त कर दिया है।
शरीर से अधिक मन को कष्ट पहुंचाने वाली घटना-अदालत
एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या दो राघवेंद्र मणि ने फैसले सुनाते हुए टिप्पणी की है कि अपराध के माध्यम से अभियुक्त ने ऐसा कृत्य किया, जो बालक के शरीर और उससे भी अधिक मन को कष्ट करने पहुंचाने वाला है। इसका प्रभाव सरलता से बालक के मन से विस्मृत नहीं होगा। सिद्धदोष का ऐसा आचरण पावन गुरु-शिष्य परंपरा के नितांत प्रतिकूल है। ऐसी स्थिति में न्यायालय के मतानुसार प्रकरण में विशिष्ट तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सिद्धदोष कमल शर्मा उर्फ पिंकी धारा चार परिवीक्षा अधिनियम का लाभ पाने प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है।