सुखरावली के गजेंद्र सिंह ने डेढ़ बीघा जमीन खरीदी था पत्नी के नाम लेकिन उस पर कब्जा हो गया। आठ साल से यह उस कब्जे को हटवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। कहते हैं आठ साल में इतनी मोटी फाइल तैयार हो गई है कि उसका वजन दो किलो हो गया है। जांच के लिए लेखपाल अधिकारी आते हैं मौके पर पहुंचकर फोटो खींचते हैं। कब्जा नहीं हटता है। अब अधिकारियों के ऑफिस के सामने धरने पर बैठने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
केस-2- 20 साल पुरानी कॉलोनी घोषित कर दी अवैध
ल्हौसरा बिसावर से आए भूपेंद्र व अन्य 65 लोगों ने वहां पर 20 साल पहले आवासीय भूखंड लिए थे। अब अलीगढ़ विकास प्राधिकरण कहता है कि यह कॉलोनी अवैध है। जबकि बैनामा हुआ है। 143 हो चुकी है। संक्रमणीय भी हो चुकी है। नोटिस भी दिया नहीं और बाउंड्री तोड़ दी हैं। नोटिस देते तो पता चलता कि किस वजह से तोड़ी है। यहां समाधान दिवस में कह देते हैं कि एडीए जाओ वहीं का मामला है।
केस-3- चक तोड़कर तारबंदी कर दी
नरौली के रहने वाले सुरेंद्र पाल के चक तोड़कर तारबंदी कर ली। सीएम पोर्टल पर शिकायत की। यह पांचवा तहसील दिवस है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। सभी स्तर पर कागज दिए हैं। अब इन कागजों का वजन ही पौन किलो तक हो गया है।
केस -4- जमीन किसी की, मुआवजा किसी को मिल गया
धनीपुर क्षेत्र के सोहन लाल ने बताया कि 1992 में जमीन खरीदी थी। उसके बाद दूसरे नंबर पर बैनामा दे दिया। हवाई अड्डे का मुआवजा भी दूसरे को मिला और जमीन पर कब्जा भी नहीं है। अब सोहन लाल तहसील के चक्कर काट रहे है। उनकी फाइल का वजन करीब 1 किलो तक हो चुका है।
यह मामले भी आए
- धनीपुर के अशोक कुमार ने ऊसर भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा किये जाने की शिकायत की।
- गोपालपुर परगना मोरथल निवासी सत्यवती देवी ने पड़ोसी द्वारा उसके प्लॉट पर कब्जा करने की शिकायत की।