विकास नगर में मां-बाप और भतीजी की हथौड़े से मारकर की हत्या के दूसरे दिन गली में पसरा सन्नाटा।
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इसे नफरत की इंतिहा ही कहेंगे। जिन मां-बाप ने पैदा कर उसे पाला और पढ़ा लिखाकर पैरों पर खड़े होने लायक बनाया। उनके कत्ल के बाद उसने चिता पर अंतिम बार शक्ल देखने जाने तक से इंकार कर दिया। हालांकि कानून में बिना अनुमति यह होता नहीं है। फिर भी पुलिस ने रात भर चली पूछताछ के दौरान मन टटोलते हुए सवाल किया कि तेरे माता पिता के शवों का पोस्टमार्टम हो गया है। वे अब अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले हैं, क्या देखने जाएगा। मगर उसने इंकार कर दिया।
महानगर के गांधीपार्क क्षेत्र की विकास नगर कालोनी गली नंबर एक में सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत ओमप्रकाश, उनकी पत्नी सोमवती व तीन वर्षीय भतीजी शिवा की हत्या सोमवार शाम उनके बेटे सौरभ ने कर दी थी। तीनों को हथौड़े और पत्थरों से बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया था।
भाई-भाभी का गुस्सा भतीजी पर उतरा
सौरभ ने स्वीकारा कि अपने भाई व भाभी के प्रति बेहद गुस्सा रखता था। हर हाल में उन्हें बर्बाद करना चाहता था। इसी गुस्से में उसने भतीजी को सामने देख मार दिया।