वर्चुअल संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व एएमयू कुलपति तारिक मंसूर।
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पीएम मोदी ने कहा कि एएमयू की स्थापना के दौरान पहली चांसलर महिला बेगम सुल्तान जहां थीं। यकीनन सौ वर्ष पहले ऐसा होना बड़ी बात है। आज भारत सरकार भी महिलाओं के लिए निरंतर काम कर रही है। इसी क्रम में तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत किया गया है। पीएम ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश में 10 करोड़ से ज्यादा शौचालय बने। उसका फायदा सभी को हुआ। यह शौचालय बिना किसी भेदभाव के बने। हालांकि, इनकी इतनी चर्चा नहीं हुई है। न ही शिक्षा जगत का इस पर इतना ध्यान गया है।
उन्होंने कहा कि एक समय था, जब हमारे देश में मुस्लिम बेटियों के स्कूल छोड़ने की दर 70 फीसदी से ज्यादा थी। मुस्लिम समाज की प्रगति में बेटियों का इस तरह पढ़ाई छोड़ना बहुत बड़ी बाधा रही है। 70 साल से हमारे यहां पर यही स्थिति रही। इन्हीं हालात में स्वच्छ भारत मिशन शुरू हुआ। गांव गांव शौचालय बने। आज स्थिति यह है कि अब मुस्लिम बेटियों के स्कूल छोड़ने की दर 30 फीसदी रह गई है। इसमें कुल 40 फीसदी तक गिरावट हुई है। मुस्लिम बेटियां पढ़ाई नहीं छोड़ें, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। एएमयू में भी पढ़ाई छोड़ने वाले छात्र छात्राओं के लिए ब्रिज कोर्स चलाया जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि एएमयू में अब छात्राओं की संख्या बढ़कर 35 फीसदी हो गई है। इस पर बधाई देना चाहूंगा। मुस्लिम बेटियों की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण पर सरकार का बहुत ध्यान है। करीब एक करोड़ मुस्लिम बेटियों को छात्रवृत्ति दी गई है। लिंग आधारित भेदभाव न हो और सभी को बराबर का अधिकार मिले। आधुनिक मुस्लिम समाज के निर्माण का जो प्रयास सर सैयद के समय शुरू हुआ था, तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत कर उसे आगे बढ़ाया गया है।
पहले यह कहा जाता था कि अगर एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है। यह बात सही है लेकिन परिवार की शिक्षा के आगे भी इसके गहरे मायने हैं। महिलाओं को इसलिए भी शिक्षित होना चाहिए ताकि वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। शिक्षा अपने साथ रोजगार और उद्यम लेकर आती है। इससे महिलाओं को स्वावलंबन मिलता है। इसी स्थिति में महिलाएं बराबर का फैसला लेने का अधिकार पाती हैं। फिर चाहे बात परिवार की हो या देश को दिशा देने की हो। उन्होंने कहा कि देश की अन्य शिक्षा संस्थाएं ज्यादा से ज्यादा बेटियों को शिक्षा से जोड़ें। उन्हें सिर्फ शिक्षा ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षा तक लेकर जाएं।