पिछले दिनों गुरुग्राम में बारिश के बाद लगे जाम के मूल कारण में एक बड़े नाले पर पूरी कॉलोनी बस जाना और उसकी वजह से जलभराव हो जाना निकल कर आया है। अलीगढ़, जहां कि जलभराव होना सामान्य सी बात है, वहां पर विभिन्न स्थानों पर नालों पर हुए अतिक्रमण और कब्जों ने स्थिति को और भी जटिल कर दिया है।
इस पर नालों में कूड़ा और मलवा फेंकने की शहर के लोगों को आदत ने नालों की धारा को लगभग रोक ही दिया है। मौसम विभाग भविष्यवाणी कर रहा है कि अगस्त और सितंबर के महीने में भी अच्छी बारिश होगी। ऐसे में यह प्रश्न विचारणीय है कि अगर नालों की धारा को सही से नहीं बहने दिया तो पहले से ही जलभराव से ग्रस्त रहने वाले इस शहर में स्थिति क्या बनेगी?
यहां स्थिति ज्यादा खराब है
शहर के वह हिस्से जहां बेहद घनी आबादी और मार्केट है वहां पर स्थिति ज्यादा खराब है। यह देखा गया है कि होटल, कचौड़ी वाले, हलवाई, ढाबे वाले, चाय वाले या ऐसे ही अन्य काम करने वाले यह लोग अपनी भट्टी नाला पाटकर बाहर ही रखेंगे। उसकी राख को भी यह लोग आसपास ही ठिकाने लगाएंगे या नाले में डालेंगे। चाय के प्लास्टिक के कप, दोने, थर्माकोल के गिलास, प्लास्टिक के गिलास आदि को यह नाले या नाली में ही डाल देते हैं या इस तरह कैरी करते हैं कि वह नाले नाली में चला ही जाता है। गांधी पार्क बस स्टैंड और मसूदाबाद बस स्टैंड पर यही स्थिति है। गांधी पार्क बस स्टैंड के साथ लगे शाहकमाल रोड पर आटोमोबाइल्स की मरम्मत मार्केट में तो दुकानें आधी सड़क तक आती हैं और मलवा नाले नालियों में डाला जाता है। इसके अलावा रसलगंज, रेलवे रोड, ढपरा रोड, सराय हकीम, देहली गेट, ऊपर कोट, खैर रोड, मसूदाबाद चौराहा जीटी रोड, रामघाट रोड पर कुछ बैंक्वेट हाल वाले अपना कूड़ा नालों में ही ठिकाने लगाते हैं। आगरा रोड पर सराय सुल्तानी, खिरनी गेट, जयगंज, गूलर रोड पर भी यही स्थिति है।
अस्थायी अतिक्रमण भी है जिम्मेदार
नालों की बदहाली के लिए अस्थायी अतिक्रमण यानी ठेल ढकेल, फड़, तख्त, सब्जी वाले भी बराबर के जिम्मेदार हैं। रेलवे रोड पर अप्सरा मार्केट के सामने कचौड़ी की दुकान पूरी नाले पर ही लगती है। ऊपर कोट जाते समय कुछ होटलों की भट्टी नाले पर ही है। इसी तरह शाहजमाल, चरखवालाल, सराय रहमान, रसलगंज, दोनों बस स्टैंड, दोदपुर, रामघाट रोड, मैरिस रोड पर लगने वाले अस्थायी अतिक्रमणों को नालों पर भी सजा लिया जाता है।
क्या है शहर के नालों की व्यवस्था
शहर के चारों ओर बड़े नाले की एक रिंग बनी हुई है। क्वार्सी चौराहे से एटा चुंगी, एटा चुंगी से मथुरा रोड पर नाले का फ्लो है। दूसरी ओर क्वार्सी चुंगी से अनूपशहर रोड जाफरी ड्रेन, जाफरी ड्रेन से सारसौल नाला, खैर रोड और नादा पुल को क्रास करता हुआ मथुरा रोड पर मिलता है। इनका फ्लो भी इसी तरह ही है। मतलब यह कि क्वार्सी चौराहे से एटा चुंगी साइड की आबादी का पानी रिंग के इस हिस्से से फ्लो करेगा और क्वार्सी चौराहे से जाफरी ड्रेन साइड की आबादी का पानी इसी साइड फ्लो करेगा। इस रिंग में शहर के छोटे और बड़े नाले मिलते हैं। जहां प्राकृतिक बहाव नहीं है वहा नगर निगम ने पंपिंग स्टेशन लगवाए हैं। जैसे जीटी रोड तहसील पर खुलने वाला नाला प्वाइंट उसकी पंपिंग सराय रहमान से होती है। इसी नाला प्वाइंट पर गूलर रोड पंपिंग स्टेशन से पंपिंग होती है।
रिंग नाले की सिंचाई विभाग नहीं करता सफाई
समस्या यह भी है कि शहर के चारों ओर जो रिंग है उसकी सफाई और खुदाई की व्यवस्था सिंचाई विभाग को करनी होती है। कई वर्षों से उस रिंग की खुदाई आदि नहीं हुई है। साथ ही इन रिंग के कई हिस्से अतिक्रमण की गिरफ्त में भी आ गए हैं। इसलिए नगर निगम शहर के अंदर नालों की सफाई कर भी ले तो पानी रिंग में ड्रेन होने में दिक्कत आती है।
नालों से कब्जे हटाने की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई
पिछले दिनों प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने अपने निरीक्षण में शहर में जलभराव और नालों पर हुए कब्जों को लेकर नाराजगी जताई थी और नालों से कब्जे हटवाने के लिए कहा था। इसी क्रम में नगर निगम ने बुधवार को मौलाना आजाद नगर में नालों से अवैध कब्जे हटाने और उनकी सफाई के लिए बड़ा अभियान छेड़ा। दो जेसीबी मशीन, एक रोबोट, पांच ट्रैक्टर, तीन ट्रक और करीब 80 सफाई कर्मचारियों के साथ नगर निगम ने अब तक का अपनी ओर से सबसे बड़ा सफाई अभियान शुरू किया। जिन लोगों ने नालों पर अवैध कब्जे कर लिए थे उनके कब्जे हटा दिए गए। सबसे शानदार बात यह रही कि जनता ने इस अभियान का दिल खोलकर स्वागत किया। अब शहर के लोगों को ऐसी ही अभियान का इंतजार है। मौलाना आजाद नगर में इस अभियान के वक्त वहां के स्थानीय पार्षद नासिर अली मौजूद थे। कुछ दिन पहले नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ने सभी पार्षदों के साथ मिलकर इस अभियान की रणनीति बनायी थी। अभियान में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुलदीप, कर अधीक्षक राजेश गुप्ता, अजीत राय, स्वच्छता निरीक्षक अविनाश रायकवार, एहसन रब, विष्णु, अंसार आदि मौजूद थे।
नाले से कब्जा छोड़ दो नहीं तो रिपोर्ट दर्ज होगी
शहर में जिन लोगों ने भी अपनी दुकान और मकानी की सीमा का उल्लंघन करते हुए नाले या नाली पर कब्जा कर रखा है उन लोगों को नगर आयुक्त ने चेतावनी दी है कि वह उसे स्वयं ही हटा लें। नगर निगम का बेड़ा जब उधर पहुंचेगा तो वह जुर्माना भी लगाएगा और हटाने का खर्चा भी वसूल करेगा। इसके बाद भी अगर लोग नहीं मानते हैं तो उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करायी जाएगी। नगर आयुक्त ने बताया कि मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देश हैं कि कुछ लोगों की वजह से पूरे शहर को समस्या में नहीं धकेला जा सकता है। कुछ लोग जो नालों को अवरुद्ध करते हैं उनकी वजह से पूरे शहर को जलभराव झेलना पड़ता है। साथ ही गंदगी भी होती है।
‘नगर निगम द्वारा चलाए गए व्यापक रूप से सफाई अभियान और नालों से अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए उनके स्तर से पुलिस प्रशासन को पर्याप्त मजिस्ट्रेट और महिला व पुुरुष बल उपलब्ध कराए जाने के लिए पत्र प्रेषित कर दिया गया है। शहर में जिन लोगों ने भी नालों आदि पर कब्जा कर रखा है उन्हें चेतावनी दी गई है
- संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त