पत्तियों का हरा रंग (क्लोरोफिल) नष्ट होने लगता है और वह पीली पड़ने लगती हैं । पत्तियों के ऊपरी हिस्से पर छोटे, गहरे या हल्के रंग के धब्बे बन जाते हैं। पत्ती के ऊतक मर जाते हैं। भूरे या काले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। पत्तियां प्रभावी ढंग से प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पातीं, जिससे पौधे को भोजन बनाने में कठिनाई होती है और उसकी वृद्धि रुक जाती है।
पतझड़ का संबंध पेड़ की सेहत से
एएमयू वनस्पति विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. अनवर शहजाद कहते हैं कि समय पर पतझड़ होने पर पेड़ की सेहत पर कोई असर नहीं होता लेकिन असमय पतझड़ पेड़ की सेहत के लिए भी नुकसान दायक है। लंबे समय तक प्रदूषण का स्तर अधिक रहने, कोहरा छाए रहने और धूप न निकलने की स्थिति में पत्तियां बीमार पड़कर गिरने लगती हैं। क्योंकि उनमें प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया रुक जाती है। यही समय से पहले पतझड़ का कारण बनता है। प्रदूषण की मौजूदा स्थिति लंबे समय तक रही तो इस बार पतझड़ फरवरी के अंत के स्थान पर मध्य जनवरी के बाद तक आ सकता है।
अलीगढ़ में पिछले सात दिनों का एक्यूआई
10 दिसंबर - 223
11 दिसंबर - 308
12 दिसंबर- 377
13 दिसंबर- 408
14 दिसंबर- 497
15 दिसंबर - 462
16 दिसंबर - 352