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किसानों ने 22 किमी लंबी ट्रैक्टर परेड निकालकर भरी हुंकार

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गणतंत्र दिवस पर भूकरावली चौराहे से किसान ट्रैक्टर परेड की नेत्तृव करती महिलाएं । - फोटो : CITY OFFICE
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तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में धरना दे रहे किसानों के आह्वान पर गणतंत्र दिवस पर मंगलवार को अलीगढ़ में भी भुकरावली से लेकर बौनेर तक 22 किमी लंबी ट्रैक्टर परेड किसानों द्वारा बाईपास पर निकाली गई। इस दौरान किसानों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री को जमकर कोसा। हालांकि पूरी रैली संयम और शांति के साथ संपन्न हुई। किसानों ने ऐसी कोई भी हरकत नहीं की, जिससे कि पुलिस-प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की नौबत आ खड़ी हुई हो। रैली में तकरीबन 60 ट्रैक्टर शामिल रहे। वहीं, 500 से अधिक किसानों ने इसमें भाग लिया। महिला किसान कमलेश देवी ने ट्रैक्टर परेड की अगुवाई सबसे आगे ट्रैक्टर चलाकर की। इसके साथ ही संपूर्ण रैली की अगुवाई 10 वर्षीय घुड़सवार मीरअली ने की।
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संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान आंदोलन के समर्थन में विशाल किसान ट्रैक्टर परेड का आयोजन वैसे तो सुबह 10 बजे प्रस्तावित था। मगर, सुबह कोहरे के कारण इसमें लेटलतीफी हो गई। दोपहर एक बजे भुकरावली अंडरपास पर झंडा रोहण कर 90 वर्षीय कामरेड किसान नेता राज सिंह ने परेड को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। परेड में सबसे आगे घोड़ों की कतार थी, जिसका नेतृत्व दस वर्षीय घुड़सवार मीर अली ने किया। इनके पीछे ट्रैक्टर परेड की अगुवाई किसान कमलेश देवी और राखी ने की। वह पूरे रास्ते ट्रैक्टर चलाती रहीं। परेड में जहां ट्रैक्टर पर सवार किसानों ने भाग लिया तो भारी संख्या में मोटर साइकिल, कार एवं साइकिलों पर सवार किसान भी साथ चले। खेरेश्वर चौराहा पर परेड को रोका गया। इसमें शामिल सभी किसानों को नाश्ता, चाय दी गई। इसके बाद रैली वहां से रवाना हुई। करीब 3:30 बजे रैली बौनेर पर पहुंची। वहां, पुलिस ने किसानों की रैली को रोक लिया। किसान नेताओं ने पुलिस के सामने अपनी बात रखी और रैली का समापन किया।
पुष्प वर्षा कर परेड का किया स्वागत
खेरेश्वर से बौनेर की तरफ परेड के आगे बढ़ने पर अलीनगर-भदेसी पर ग्रामीणों द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत एवं उत्साहवर्द्धन किया गया। इस बीच किसानों के कृषि-विरोधी कानूनों को वापस लिए जाने की मांग का समर्थन करते हुए नारे भी लगाए। वहीं, परेड के बौनेर पहुंचने पर बौद्ध धर्मावलंबियों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। साथ ही किसानों के लिए भोजन का भी प्रबंध किया। परेड के यहां खत्म होने का बाद एक जन सभा हुई, जिसमें किसान नेताओं ने अपने-अपने विचार रखे। एक सात साल की बच्ची द्वारा बल्ली सिंह चीमा का प्रसिद्ध गीत ’ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के .... गाया।
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दिल्ली की घटना पर दुख जताया, कानून को देश विरोधी बताया
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक शशिकांत ने बौनेर पर हुई सभा में तीन नए कृषि कानूनों को किसान विरोधी काला कानून, खेती-किसानी एवं मजदूर विरोधी होने के साथ-साथ देशविरोधी भी करार दिया। विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि जब तक यह काले कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। संघर्ष जारी रहेगा। मोर्चा संयोजक शशिकांत ने दिल्ली में हुई घटना पर क्षोभ व्यक्त किया। सभा की अध्यक्षता सूरजपाल ने की। सभा में किसान कमलेश यादव, विनोद सिंह, अशोक प्रकाश, इंदरीश मोहम्मद, जनार्दन अनुरागी, विनोद चौहान, भूपेंद्र सिंह पिंकी, कुलदीप सिंह चौहान, रामखिलाड़ी सविता आदि मौजूद रहे।
इन संगठनों ने लिया परेड में भाग
अखिल भारतीय किसान सभा, बेरोजगार मजदूर किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन-टिकैत, भारतीय किसान यूनियन-अंबावता, भारतीय किसान यूनियन-भानू, भारतीय किसान यूनियन-महाशक्ति, भारतीय किसान यूनियन-हरपाल, भारतीय किसान यूनियन-सुनील, अखिल भारतीय किसान यूनियन, भारतीय किसान संगठन आदि किसान-संगठनों ने परेड में भाग लिया।
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दिल्ली में जिस वक्त किसान परेड के दौरान हिंसा हो रही थी। अलीगढ़ में आयोजित किसान परेड में शामिल किसान नेता पल-पल पर उसकी खबर ले रहे थे। मगर, वहां की घटना को लेकर अलीगढ़ में उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं होने दी। रैली जैसे-जैसे भुखरावली से बौनेर की ओर आगे बढ़ रही थी दिल्ली की हिंसा की एक के बाद एक खबर सोशल मीडिया पर वीडियो सहित वायरल हो रही थी। कुछेक युवाओं ने इसको लेकर नारेबाजी भी शुरू की। मगर, किसान परेड में शामिल वरिष्ठ नेताओं ने कमान अपने हाथ में रखते हुए किसी भी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा न देेने की अपील की। पूरी रैली युवाओं, महिलाओं, बच्चों को संयम के साथ परेड का समापन कराने की अपील की गई।
इधर, पुलिस-प्रशासन के भी दिल्ली की खबर पाकर सांसे फूल रहीं थीं। पुलिस ने भी धैर्य के साथ काम किया। सीओ कर्मवीर खुद अपने स्टाफ के साथ परेड के आगे अपनी गाड़ी में सवार होकर चलते रहे। वह लगातार अधिकारियों को इनपुट देते रहे। इसके साथ ही इंटेलिजेंस टीम भी रैली में किसानों के बीच जाकर पल-पल की खबर लेती रही।
पुलिस-प्रशासन की तैयारी आई काम, शांतिपूर्ण रही परेड
अलीगढ़। पुलिस-प्रशासन के सामने किसान परेड को शांति पूर्ण कराने की जो चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। उससे निपटने की तैयारी काम आई। अधिकांश किसानों को तहसीलों में ही रोक लिया गया। राजनेताओं को रैली में शामिल नहीं होने दिया गया। इधर, एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी द्वारा लगाए 10 सेक्टर मजिस्ट्रेट व डीएम चंद्रभूषण सिंह द्वारा लगाए गए तीन सुपर मजिस्ट्रेट लगातार पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में रहे। पुलिस व मजिस्ट्रेट बौनेर बाईपास, खेरेश्वार चौराहा, भुकरावली अंडरपास सहित बाईपास पर अलग-अलग टुकड़ियों में तैनात रहे।
टप्पल पर पुलिस प्रशासन का सर्वाधिक फोकस
दिल्ली बॉर्डर होने के कारण टप्पल स्थित यमुना एक्सप्रेस वे पर पुलिस प्रशासन का सर्वाधिक फोकस रहा। इस दौरान दिन भर आरएएफ, पीएसी व पुलिस इंटरचेंज पर चारों ओर, मथुरा बॉर्डर व जेवर बॉर्डर पर तैनात रही। दोपहर में खुद एसएसपी मुनिराज जी, एसपी देहात शुभम पटेल, एडीएम ई आदि ने वहां पहुंचकर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। इस दौरान एक बार यह खबर मिली कि मथुरा के चर्चित किसान नेता रामबाबू कटेलिया के आने के कारण माहौल बिगड़ गया है। मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ था।
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