यमुना एक्सप्रेस वे पर दक्षिण भारतीय यात्रियों की टूरिस्ट बस रविवार तड़के टप्पल क्षेत्र में हवाई जहाज का पेट्रोल लेकर जा रहे टैंकर में पीछे से जा घुसी। इस जबरदस्त भिड़ंत में बस हेल्पर सहित दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन दर्जन यात्री गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
खबर पर पुलिस ने पहुंचकर बस के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला और एंबुलेंसों की मदद से सभी को नोएडा कैलाश अस्पताल भिजवाया। खास बात यह रही कि इस दौरान टैंकर में आग लगने से बच गई। वरना दुर्घटना और बड़ी हो सकती थी। देर शाम समाचार लिखे जाने तक दो दर्जन यात्रियों का इलाज जारी था। बाकी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। इधर, दुर्घटना की खबर पर आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री ने जानकारी लेते हुए वहां के कमिशभनर को भी नोएडा भेजा है।
आंधप्रदेश के प्रकासम जनपद के ग्रामीण क्षेत्र बंगलू के रहने वाले यात्रियों की बस बनारस, दिल्ली, आगरा, मथुरा श्रीकृष्ण जन्मस्थान, वृंदावन आदि स्थानों पर भ्रमण के लिए आई थी। टूरिस्ट बस में 50 के करीब यात्री सवार थे।
दिल्ली से यह बस रात में ही आगरा के लिए रवाना हुई और 4 बजे करीब टप्पल इंटरचेंज से बमुश्किल 7 किमी आगे पहुंची होगी, तभी अचानक बस ड्राइवर को नींद का झोंका आने के कारण अचानक आगे धीमी गति से चल रहे पेट्रोल टैंकर में जा घुसी। यह टैंकर दिल्ली एयरपोर्ट से लखनऊ हवाईजहाज का पेट्रोल लेकर जा रहा था। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के अगले हिस्से में बैठे बस हेल्पर 22 वर्षीय श्रीकांत व एक 57 वर्षीय यात्री मुरीपल्ली अजमेलू की मौके पर ही मौत हो गई। राहगीरों की खबर पर टप्पल एसओ मौके पर पहुंचे। जहां ग्रामीणों की मदद से बस के शीशे आदि तोड़कर यात्रियों को निकाला गया।
खबर देकर 108 सेवा, टोल प्लाजा और कैलाश हॉस्पिटल की करीब दर्जन भर एंबुलेंस बुला ली गईं। तब जाकर सभी को कैलाश अस्पताल नोएडा भिजवाया गया। जहां कुल 36 यात्री भरती कराए गए। इनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया।
9 को हल्की चोटों के चलते इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। देर शाम तक 25 यात्री अस्पताल में भरती थे। घायलों में समैया (45), जी वेंकटेश्वर (42), ए श्रीनिवासन (45), अंजुम (43), जयदेवी (52) की हालत ज्यादा नाजुक बनी हुई है। टप्पल पुलिस ने दोनों शवों का नोएडा में ही पंचनामा पोस्टमार्टम की कार्रवाई की है। एसओ टप्पल के अनुसार बस व टैंकर हाईवे से हटवा दिए गए हैं। बाकी कार्रवाई जारी है।
बुलाना पड़ा तमिल भाषा अनुवादक की जरूरत
एसओ टप्पल के अनुसार सभी यात्रियों की स्थिति यह थी कि वह तमिल ही बोल पा रहे थे। न हिंदी समझ रहे थे और न अंग्रेजी। इसके चलते उनके नाम पते तक समझ पाने में बड़ी मुश्किल हुई। बाद में अस्पताल प्रशासन की मदद से दिल्ली से एक तमिल भाषी व्यक्ति बुलाया गया। जिसने भाषा अनुवादक की भूमिका निभाते हुए सभी के नाम पते आदि की जानकारी कराई। तब जाकर उनके नाम व घर के पते मालूम हुए और उनके परिजनों को सूचना दी गई।
यात्रियों की जिद ने ही कराई दुर्घटना
पुलिस पूछताछ में बस ड्राइवर व अन्य यात्रियों ने स्वीकारा कि बनारस गंगास्नान के बाद दिल्ली आए थे। लंबे सफर के बाद जब दिल्ली से हम लोग चले थे, तभी बस चालक व हेल्पर ने कहा था कि आगरा दिन निकलते ही पहुंच जाएंगे। इसलिए कुछ देर जेवर टोल पर आराम कर लेते हैं। मगर यात्रियों ने जिद कर दी कि अभी चलो, आगरा पहुंचकर आराम कर लेना। बस इसी जिद पर ड्राइवर चल दिया।
आग लगती तो क्या होता
हवाईजहाज के प्रयोग में आने वाला पेट्रोल अत्यंत ज्वलनशील होता है। जिस समय दुर्घटना हुई, उस समय दोनों वाहनों की रंग से चिंगारी भी उठी। मगर किसी तरह टैंकर ने आग नहीं पकड़ पाई। अगर टैंकर आग पकड़ता तो क्या होता। इसके अंदाजे मात्र से ही लोग सिहर रहे हैं।
टोल प्लाजा पर रुकवाए शेषयात्री
एसओ के अनुसार जो एक्सीडेंट में बच गए या जिनकी अस्पताल से इलाज के बाद छुट्टी कर दी गई। उन सभी को जेवर टोल प्लाजा के गेस्ट रूम में ठहरवाया गया है। वहां बस का इंतजाम किया जा रहा है।