सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस बार यह हिंदी वर्ष (हिंदू पंचांग) के आखिरी दिन पड़ रही है। इसी कारण यह अत्यंत महत्वपूर्ण भी है। इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत भी रखती हैं।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि सोमवार चंद्र देवता को समर्पित दिन है। भगवान चंद्र को मन का कारक माना जाता है। अत: इस दिन अमावस्या पड़ने का अर्थ यह है कि मन संबंधित दोषों को दूर करने के लिए उत्तम है। हमारे शास्त्रों में चंद्रमा को ही दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों का कारक माना जाता है। अत: पूरे वर्ष में एक या दो बार ही पड़ने वाले पर्व का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। महिलाओं द्वारा इस दिन पति की दीर्घायु के लिये व्रत का विधान है। इसके अलावा दान-पुण्य, पीपल की पूजा, गंगा स्थान का भी रिवाज है। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन चंद्रमा का अमृतांश पृथ्वी पर सबसे अधिक पड़ता है।