जिले के अपराधियों की हत्या सरीखे संगीन अपराध के बाद राजस्थान में नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी का यह पहला मामला नहीं। इससे पहले वर्ष 2011-12 में दीवानी परिसर में पुलिस अभिरक्षा में हत्या के नामजद राजस्थान के भरतपुर में हत्या के समय पकड़े दिखाए थे। इसी तरह 2021 में गांधी आई तिराहे पर कारोबारी संदीप की हत्या में शामिल दो शूटर राजस्थान के भरतपुर में पिस्टल सहित पकड़े दिखाए थे।
मुठभेड़ से बचने को गिरफ्तारी का अंदेशा
हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार टाइगर गैंग के सरगना हेमू चौधरी की गिरफ्तारी के लिए जनपद पुलिस प्रयासरत थी। अब तक पांच लोग पकड़े गए। मगर हेमू अचानक से राजस्थान की जेल चला गया। इसे लेकर अंदेशा है कि वह शिवा के मुठभेड़ में पकड़े जाने के बाद कहीं इसी डर से तो इस तरह सुनियोजित तरीके से जेल तो नहीं चला गया।
जमीन हड़पने व वर्चस्व के लिए मारा चाचा को:सुमित
इस हत्या के बाद मृत प्रॉपर्टी डीलर के भतीजे सुमित चौधरी ने शुक्रवार को पहली बार मीडिया के सामने अपनी बात रखी। सुमित ने कहा कि चाचा द्वारा दिनेश की 7 लाख की बेईमानी की बात सरसर गलत है। 10 - 20 लाख तो उसके चाचा ने दिनेश को जमीन में दे रखे थे। चुनावों से पहले ही ग्राम सभा में 10 लाख रुपये के काम कराए। गरीब कन्याओं की शादी करा दी। ऐसे में सात लाख का आरोप निराधार है। बल्कि करोड़ों रुपये कीमत की संपत्ति को कब्जाने व प्रापर्टी कारोबार में वर्चस्व के लिए दिनेश व हेमू ने एक होकर हत्या की है। हाल में कुछ जमीन ऐसी भी खरीदी हैं, जो दिनेश के नाम हैं। दिनेश ने ही हेमू को प्रापर्टी व्यापार में शामिल किया था। दूसरा हेमू के अंदर डॉन बनाने की ख्वाहिश रहती थी। वह कहता था कि एक दिन गांव कोंडरा को उसके नाम से जाना जाएगा।
सुमित के अनुसार हेमू के पिता और ताऊ सरिया फैक्टरी में उनके ट्रैक्टर चलाते थे। चाचा सोनू ने हमेशा हेमू की मदद की। जब जरूरत होती हेमू रुपये ले जाता था। घटना से 5 दिन पहले 19 जुलाई की रात करीब साढ़े 9 बजे हेमू कार से उनके घर आया और चाचा से उज्जैन जाने की कहकर एक लाख रुपये उधार ले गया। ये पता नहीं था कि हेमू आस्तीन का सांप निकलेगा। इसके बाद जब हत्या के अगले दिन उसकी इंस्टा आईडी बंद हुई। तब उस पर शक गहराया था। उससे पहले तक हर दिन का अपडेट डाल रहा था। इन सभी बातों को पुलिस के साथ साझा किया।
नामजद को छोड़ने पर हैरत
इधर, सुमित ने हत्या में नामजद मेघराज को 7 अगस्त को छोडऩे पर चिंता जताई है। इस मामले में सीओ से भी शिकायत की गई है। विपक्षियों की संलिप्तता के साक्ष्यों को पुलिस ने कैसे नकार दिया। न इस बारे मे उनके परिवार को पुलिस ने कोई जानकारी दी। हालांकि सीओ राजीव द्विवेदी का यही कहना है कि अभी जांच चल रही है।