इस समय अलीगढ़ में जाम की सबसे बड़ी वजह ऑटो और ई-रिक्शा ही बन रहे हैं। स्थिति यह है कि इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आरटीओ में पंजीकृत ऑटो की संख्या की अगर बात करेंगे तो 819 है लेकिन सड़कों पर 5000 से भी ज्यादा हैं। इतना ही नहीं जिनका परमिट गांव का है वह भी महानगर में चल रहे हैं। लेकिन फिर भी कोई देखने वाला नहीं है। कभी चेकिंग अभियान तक नहीं चलता है। इतना ही नहीं क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वालों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जबकि आए दिन हादसे हो रहे हैं। इन हादसों से भी अफसरों की नींद नहीं टूट पा रही है।
ई-रिक्शा की संख्या बढ़कर भी 7000 के पार हुई
इस समय ऑटो से ज्यादा ई-रिक्शा की भीड़ है। शहर के किसी भी चौराहे या सड़क पर देख लीजिए ई-रिक्शा की लाइन नजर आ जाएगी। तमाम ई रिक्शा ऐसे भी हैं जिन पर नंबर तक नहीं है। अगर यह कोई हादसा कर दें तो पहचान करना भी मुश्किल होता है। पंजीकृत ई-रिक्शा की संख्या भी 2000 ही है लेकिन इस समय महानगर में 7000 दौड़ रहे हैं। लेकिन इनका पंजीकरण क्यों नहीं हो रहा। इसकी जिम्मेदारी किसकी है इस पर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा।
84 दिन बाद भी रूट तय नहीं कर सका प्रशासन
21 सितंबर को नगर निगम और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त मीटिंग में तय हुआ था कि ऑटो का रूट तय किया जाएगा। 12 रूट फाइनल किए गए थे। मीटिंग में बताया गया था कि इन 12 रूट पर ही ई-रिक्शा दौड़ेंगे। अगर किसी दूसरे रूट पर दिखेंगे तो चालान किया जाएगा। इस बात को भी 84 दिन का वक्त बीत गया लेकिन अभी तक अधिकारी इस प्लान को लागू नहीं कर पाए हैं। शहर की लड़खड़ाई ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए यह प्लान बनाया गया था। स्थिति यह है कि अब अधिकारी इस पर बात भी नहीं करते।