शब-ए-बरात आज है। इस त्योहार को इस्लाम मजहब में इबादत की रात के लिए जाना जाता है। इस्लामी कैंलेंडर के मुताबिक यह आठवां महीना शाबान है। 14वीं तारीख यानी बृहस्पतिवार को सूरज के छिपने के बाद इबादत शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन सूरज के निकलने तक जारी रहेगी।
इस्लामी स्कॉलर चौधरी इफराहीम हुसैन बताते हैं कि हर रात से बेहतर शब-ए-बरात की रात होती है। पूरी रात इबादत की जाती है। गुनाहों से निजात पाने का बेहतर मौका है। यह रात बरकत वाली रात है। रात भर इबादत के बाद लोगों का काफिला कब्रिस्तान की रुख करता है, जहां बिछुड़े रिश्तेदारों को खिराजे अकीदत पेश करते हैं। हालांकि, इस बार यह सब कोरोना वायरस के संक्र्तमण और लॉक डाउन के चलते नहीं हो पाएगा।
शहर मुफ्ती के फतवे पर होगा अमल
शब-ए-बरात पर शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने मस्जिदों के बजाय घरों पर इबादत करने का जो फतवा दिया है, उस पर अमल होगा। समाजसेवी गुलजार अहमद ने कहा कि शहर मुफ्ती का हुक्म को मानना हर मोमिन के लिए फर्ज है। शाहजमाल कब्रिस्तान कमेटी के जिम्मेदार हफीज अहमद अंसारी ने कहा कि शहर मुफ्ती ने शुक्र्तवार भोर में लोगों के कब्रिस्तान में खिराजे अकीदत पेश करने पर पाबंदी लगाई है, उसे सबको मानना चाहिए।