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1857ᅠसे पहले हिंदू मुसलमानों में सांप्रदायिक भेदभाव नहीं था : प्रोफेसर समदान

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विधि संकाय द्वारा आजादी अमृत महोत्सव के अंतर्गत भारत का स्वतंत्रता संघर्ष विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लॉ फैकल्टी के डीन प्रोफेसर शकील समदानी ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम वास्तव में बहुत पहले ही शुरू हो गया था, जब टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के साथ संघर्ष शुरू किया था। प्रोफेसर समदानी ने कहा कि 1857 से पहले हिंदुओं और मुसलमानों में सांप्रदायिक भेदभाव भी नहीं था और यह उस बात का प्रमाण है कि सभी भारतीयों ने एक मत से 1857 में बहादुर शाह जफर को अपना नेता घोषित किया था।
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प्रोफेसर शकील समदानी ने कहा कि गांधी जी द्वारा दांडी मार्च की शुरुआत के दिन आजादी के अमृत महोत्सव का प्रारंभ करना भारत सरकार की एक अत्यंत सराहनीय पहल है। गांधी जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर बहुत बल दिया और खिलाफत आंदोलन द्वारा हिंदू-मुस्लिम एकजुटता लाने का काम किया।
कार्यक्रम में इतिहास विभाग के प्रोफेसर एम वसीम राजा ने कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष कोई एक दिन का संघर्ष नहीं था। बल्कि वर्षों का संघर्ष व बलिदान था। आजादी का महत्व सर्वाधिक है। यह सभी सुख सुविधाओं से ऊपर है। पहले हमारे देश में राष्ट्रीयता का अभाव था, इसलिए अंग्रेजों ने फूट डालो व राज करो की नीति अपनाई।
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वर्षों तक हमारे ऊपर शासन किया। भारत अनेकता में एकता का देश है। यहां कई भाषाएं, संस्कृति व सभ्यता हैं। फिर भी हम एक हैं। प्रोफेसर राजा ने कहा कि गांधी जी ने इसी अनेकता में एकता पर बल दिया। ला सोसाइटी की सचिव आयशा अल्वी ने वेबिनार का संचालन किया। कार्यक्रम में हिबा जहीर, पूर्व सचिव अब्दुल्ला समदानी, महालका अबरार, शैलजा सिंह, फौजिया कैफ सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
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