बच्चे को अगवा करने वाले गैंग का मकसद सिर्फ अपहरण कर फिरौती वसूलना ही नहीं था, बल्कि सिलसिलेवार संपन्न परिवारों के चार और बच्चों का अपहरण करना था। इन सभी की पिछले एक माह से रैकी चल रही थी। सोमवार को मनी को अगवा करने का मौका मिल गया और लेकर चल दिए। जब पुलिस को यह जानकारी हुई तो दंग रह गई। इन का उद्देश्य फिरौती वसूलकर धन जुटाना और इलाके में दहशत कायम करना था। मगर पहले ही कांड में ये नौसिखिये पुलिस की चाल में फंस गए और जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए।
पुलिस पूछताछ में उजागर हुआ कि मुख्य आरोपी 22 वर्षीय चमन व 28 वर्षीय अखिलेश इस गैंग के सरगना हैं। अखिलेश गाजियाबाद की किसी कंपनी में अब तक नौकरी करता था। आकाश के जरिये चमन व अखिलेश की मुलाकात करीब दो माह पहले हुई थी। तभी अखिलेश ने चमन को यह प्लान बनाने के लिए तैयार किया और कहा कि अपने साथ कुछ और लोगों को जोड़ लो। इस धंधे को शुरू करेंगे तो हमारी माली हालत भी दूर होगी और इलाके में दहशत का माहौल भी बनेगा। अखिलेश के कहने पर चमन ने रुपयों का लालच देकर मेहनत मजदूरी करने वाले गुड्डू व सचिन को अपने साथ मिलाया।
सीओ इगलास राघवेंद्र सिंह के अनुसार पूछताछ में उजागर हुआ कि अखिलेश की बहन की शादी होनी है। उसी की तैयारियों के सिलसिले में वह गांव आया था। यहां उसने अपने नवगठित गैंग के समक्ष 50 हजार रुपये की जरूरत का मुद्दा रखा। इसी में तय हुआ कि जल्दी एक बच्चे का काम कर दें तो रुपये मिल जाएंगे। बाकी ने भी अपनी शौक मौज से जुड़ी अन्य जरूरतें बताईं और इसके बाद इस बच्चे को उठाना तय किया गया।
बच्चे को अगवाकर पहुंचे नरौरा, लालच दे वापस बुलाए
बच्चे के गायब होने की शुरुआती खबर परिवार ने पुलिस को करीब 8-8:30 बजे दे दी थी। मगर 9:10 बजे जैसे ही पहली बार फिरौती की रकम के लिए कॉल आई और पुलिस को बताया तो खुद एसपी देहात पलाश बंसल, सीओ इगलास राघवेंद्र सिंह, मडराक पुलिस, एसओजी व सर्विलांस सहित गांव पहुंच गए। अपराधियों ने अगवा बच्चे मनी के चाचा विनोद के मोबाइल पर पहला कॉल किया था। इस पर पुलिस ने विनोद को समझाया कि बदमाशों को बातों में फंसाए रखना है और बच्चे से बात करने की जिद करनी है। इस दौरान करीब पांच कॉल बदमाशों की ओर से विनोद के मोबाइल पर की गईं। उन्होंने ऑनलाइन भुगतान मांगा। मगर विनोद ने पुलिस के समझाने पर कहा कि वे पहले बच्चे से बात करना चाहते हैं। इस पर बदमाशों ने बच्चे से बात कराई। फिर विनोद ने उन्हें बताया कि वह नगद भुगतान कर सकता है, ऑनलाइन लाइन नहीं। बस इसी बात पर बदमाश तैयार हो गए और उनकी ओर से कहा गया कि स्कूटी की डिग्गी में रकम रखकर मनोहरपुर कायस्थ के मोड़ वाले खाली मैदान पर पहुंचना है। इससे पहले दो बार रुपयों के इंतजाम के लिए भी कॉल किया गया। विनोद हर बार बच्चे से बात करता और उसकी कुशलक्षेम पूछता। इस दौरान विनोद नियत समय पर रुपये लेकर मनोहरपुर कायस्थ पहुंच गया। मगर तब तक सर्विलांस टीम सक्रिय हो गई थी। बदमाशों द्वारा जिन दो नंबरों से विनोद को बदल-बदलकर कॉल की जा रही थी। हालांकि वे कॉल करने के बाद हर बार मोबाइल बंद कर रहे थे। मगर स्थान बदलने पर उनकी लोकेशन मिलती रही। इसी बीच उन्हें नरौरा से लौटते समय हाथरस अड्डा पर घेर लिया गया।
रकम वसूलकर बच्चे को मारने का था प्लान
अपहरण कर जिस बच्चे को उठाया गया था। उसके घर व मुख्य आरोपी चमन के घर में महज आठ घरों का अंतर है। बच्चा चमन को भलीभांति जाना था। वह उसे चॉकलेट टॉफी खिलाकर अपने साथ लेकर गया था। इस बीच उसकी दो-तीन बार चाचा से बात भी कराई गई तो बच्चे ने ज्यादा परेशान नहीं किया। मगर उसे नहीं पता था कि अपराधी उसे जान से मारने का मंसूबा पाले बैठे हैं। यह बाद खुद आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकारी। सीओ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि बच्चा चमन को पहचानता था। इसलिए उनकी मंशा थी कि परिवार बहुत ज्यादा पहुंच वाला और जानकार नहीं है। वह एक ही धमकी में रुपये दे देगा। इसके बाद बच्चे को मारकर नरौरा गंगा में फेंक देंगे। इसी मकसद से वे सीधे नरौरा पहुंचे थे। जब पहली फिरौती कॉल के बाद पुलिस ने सीसीटीवी में उनको देखना शुरू किया तो कमांड कंट्रोल सेंटर प्रभारी धीरेंद्र सिंह ने उन्हें हाथरस अड्डा से महेंद्र नगर होकर बाईपास के रास्ते रामघाट रोड पर जाते कैद पाया। तभी पुलिस उनके पीछे हो गई थी।
सीओ के अनुसार चमन ने स्वीकारा कि बेशक बच्चे का पिता कारपेंटर है। मगर घर में गाड़ी व खेती देख उन्हें उम्मीद थी कि ये रुपये आसानी से दे देंगे। बच्चा उसे पहचानता है, इसलिए उसे ले जाने में भी दिक्कत न होगी। रुपये देकर उसे मार देंगे। प्लान यह था कि दो लोग यहां आकर रुपये वसूलेंगे और रुपये मिलते ही नरौरा में जो तीन लोग रुकेंगे, वे बच्चे को मार देंगे। बच्चे को अगवा करने के बाद उसे सभी लोग नरौरा ले गए। वहां से चमन वापस गांव लौटकर आया था, उसने गांव की स्थिति को देखा। पाया कि अभी तक पुलिस को सूचना नहीं है। इसके बाद उसने अपने साथियों को इशारा किया, तब फिरौती की रकम मांगी गई। जैसे ही गांव में पुलिस पहुंची, वह वहां से निकल आया और अपने साथियों का हाथरस अड्डे पर इंतजार कर रहा था। वहीं से बदमाशों की लोकेशन मिलने में सफलता हुई।
बच्चे ने मांगा खाना, पिता ने जताया आभार, टीम को इनाम
रात तीन बजे जैसे ही अगवा मनी थाना मडराक पर पहुंचा और अपने माता-पिता के सामने आया तो उनसे लिपटकर रोने लगा। साथ में बच्चे ने अपनी मां से भूख लगने की बात कहते हुए खाना भी मांगा। बच्चा सहमा तो था, मगर उसे यह अंदाजा नहीं था कि उसके साथ क्या हुआ है। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने खुलासे में शामिल रही टीम इंस्पेक्टर महामाया प्रसाद सिंह, एसएसआई मनीष कुमार बालियान, एसआई अंकित सिंह, सोहनवीर सिंह, संदीप कुमार स्वाट टीम प्रभारी नगर क्षेत्र, रोहित राठी स्वाट टीम देहात क्षेत्र, जोगेंद्र सिंह सर्विलांस प्रभारी, हेड कांस्टेबल सोहेब आलम सर्विलांस टीम, कांस्टेबल मुरारी सर्विलांस टीम, कांस्टेबल नवीन कुमार भारद्वाज स्वाट टीम, सचिन कुमार स्वाट टीम, गौरव कुमार स्वाट टीम, योगेश कुमार स्वाट टीम देहात क्षेत्र, मुरारी लाल स्वाट टीम देहात क्षेत्र, हेडकांस्टेबल सुखवीर स्वाट टीम नगर, संदीप स्वाट टीम नगर क्षेत्र, याकूब खान स्वाट टीम नगर क्षेत्र, कांस्टेबल अंकुश दबाश स्वाट टीम नगर, जितेंद्र राणा, जितेंद्र कुमार, गौरव कुमार को 25 हजार के इनाम की घोषणा की है।