शहर में रविवार को प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (पीईटी) सकुशल संपन्न हो गई, लेकिन अभ्यर्थियों को एक और परीक्षा देनी पड़ी। हजारों अभ्यर्थियों को शहर के जाम से जूझना पड़ा। इसके बाद शहर के तीनों रोडवेज बस अड्डों पर बसों के लिए भटकना पड़ा। ये हालात शाम तक रहे। इधर, अवैध वाहन संचालकों ने भी मनमाना किराया वसूला। घर जाने की मजबूरी के चलते इन अभ्यर्थियों को वाहनों में लटककर सफर करना पड़ा। खासतौर पर महिला अभ्यर्थियों व उनके परिजनों को खासी परेशानी हुई।
शहर में कासगंज, एटा, हाथरस, मथुरा, आगरा, बुलंदशहर, हापुड़, मेरठ, बागपत आदि शहरों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रारंभिक पात्रता परीक्षा देने पहुंचे थे। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के साथ उनके अभिभावक भी निजी वाहनों से परीक्षा दिलाने पहुंचे थे तो अधिकांश रोडवेज बसों एवं ट्रेनों के जरिये आए थे।
परीक्षा समाप्त होने पर दोपहर एवं शाम के वक्त घर वापसी के दौरान गांधीपार्क, मसूदाबाद एवं सारसौल सेटेलाइट बस अड्डे पर अभ्यर्थियों की भारी भीड़ रही। रोडवेज बसों के लिए परेशान होना पड़ा। संबंधित रूट की बसों के आने पर धक्का-मुक्की शुरू हो जाती। सीटों को लेकर मारा-मारी देखने को मिली। हालात यह थे कि बस की खिड़कियों से भी युवा घुसने की मशक्कत करते दिखे।
चूंकि, बसों की संख्या सीमित थी और अभ्यर्थियों की संख्या अधिक थी। ऐसे में अभ्यर्थियों को वाहनों के लिए घंटों भटकना पड़ा। इसको लेकर उनमें रोष देखा गया। उनका कहना था कि रोडवेज विभाग के अफसरों के स्तर से आने-जाने के लिए पर्याप्त बसों की व्यवस्था नहीं की गई है, जबकि उन्हें पहले से इस परीक्षा के आयोजन की जानकारी थी। उधर, एआरएम, रोडवेज वाईपी सिंह का कहना है कि यात्रियों की संख्या के अनुरूप संबंधित रूटों पर बसों का संचालन किया गया ।
परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के बदले मनमाना किराया
अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के बदले ऑटो, ई-रिक्शा चालकों ने मनमाना किराया वसूला। दूसरा शहर में मुख्यमंत्री का दौरा होने के चलते भी उन्हें जाम के साथ आवागमन में समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके चलते कई अभ्यर्थी तय समय पर परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुंच सके। हालांकि उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई।