कोरोना की संभावित तीसरी लहर से चिंता बढ़ गई है। अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि इस लहर से सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होंगे। तीसरी लहर के खतरों से बच्चों को बचाने के लिए अलीगढ़ सहित देश एवं प्रदेश में व्यापक स्तर पर तैयारी हो रही है। दूसरी लहर में बड़ी संख्या में जान गंवाने के बाद तीसरी लहर से बचाव के लिए पहले से तैयारी काबिले तारीफ है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हम तीसरी लहर को आने से नहीं रोक सकते हैं। प्रस्तुत है विशेषज्ञों की राय ...
हम चाहे तो तीसरी क्या, सारे लहरों को रोक सकते हैं। लहर हमारी लापरवाही से आती है। मास्क का सही इस्तेमाल करें, सामाजिक दूरी का ध्यान रखें और बार-बार हाथ धोते रहें। टीकाकरण सहित कुछ अन्य सावधानी एवं सतर्कता को अपनाकर हम तीसरी लहर के खतरों को टाल सकते हैं।
- डॉ. विपिन गुप्ता, अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
1918 में स्पेनिश फ्लू कुछ गैप के बाद ज्यादा घातक साबित हुआ था। उसको ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ कोरोना की दूसरी लहर की बात रहे थे, लेकिन उसे हल्के में लिया गया, जिसका परिणाम सामने है। मास्क, दूरी एवं टीकाकरण को अपनाकर तथा कड़ाई से नियमों का पालन कर हम तीसरी लहर को टाल सकते हैं।
- डॉ. बाल किशन, पं. दीनदयाल उपाध्याय कोविड चिकित्सालय के पूर्व प्रभारी
दूसरी लहर इसलिए आई कि हमलोग लापरवाह हो गए। मास्क, दो गज की दूरी एवं सफाई का ध्यान नहीं रखा। टीकाकरण के प्रति उदासीन रहे। वक्त की नजाकत को देखते हुए हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। सुरक्षा मानकों को याद रखना होगा। टेस्टिंग, ट्रेसिंग एवं ट्रीटमेंट को जारी रखना होगा।
- डॉ. शोएब अंसारी, महामारी रोग विशेषज्ञ, सीएमओ ऑफिस
टीकाकरण एवं अन्य बेसिक चीजों को अपनाकर हम तीसरी लहर को रोक सकते हैं। कोरोना कर्फ्यू को बहुत दिनों तक नहीं खींच सकते। स्वयं सावधान रहें। घर में प्रवेश से पहले जूता-चप्पल व कपड़े खोल दें। स्नान कर ही बच्चों के पास जाएं। बच्चों को पौष्टिक भोजन दें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा हो।
- डॉ. विभव वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ
इस अवधि में हमें बच्चों को ऐसा बनाना है कि वायरस ज्यादा प्रभावित न कर सके। पौष्टिक भोजन के माध्यम से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना होगा। स्वयं, परिजन, शुभचिंतक, ड्राईवर, फल वाले, सब्जी वाले सहित अपने संपर्क के लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। कोविड प्रोटोकॉल का ख्याल रखें।
- डॉ. विकास मेहरोत्रा, बाल रोग विशेष
बच्चों पर खतरा क्यों...
चिकित्सकों का कहना है कि 18 से अधिक उम्र के लोगों को टीका लग चुका है या लग रहा है। टीका लगाकर ही कोरोना से बचा जा सकता है। अभी बच्चों के लिए टीका नहीं है। इसी वजह से तीसरी लहर में सबसे ज्यादा बच्चों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
घर से बाहर जाने एवं फील्ड में काम करने वाले सदस्य संक्रमण के वाहक बन सकते हैं। टीका लगने के बाद 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग सुरक्षित हो जाएंगे, लेकिन उनके माध्यम से घरों में संक्रमण पहुंचने की आशंका है।