खसरे की रोकथाम के लिए शासन से मिले निर्देशों के क्रम में अब गांव-गांव बच्चों पर नजर रखी जाएगी। किसी भी बच्चे में लक्षण दिखते हैं तो टीम जिला मुख्यालय पर सूचित करेगी। इसके बाद सैंपल लिए जाएंगे। यह भी देखा जाएगा कि कोई बच्चा खसरा के टीके से वंचित तो नहीं है। इस दिशा में अब ग्रामीण अंचल में बैठक कर स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया जा रहा है।
पिछले शुक्रवार को शासन स्तर से हुई समीक्षा बैठक में एमएआर टीकाकरण पर विशेष जोर दिया गया है। इस टीकाकरण में कमजोर जिलों को विशेष दिशा-निर्देश मिले हैं, जिनमें हाथरस भी शामिल है। एमएमआर टीकाकरण बच्चों में खसरा, कंठमाला व रूबेला की रोकथाम के लिए होता है। एमआर-वन व एमआर-टू डोज के लिए विशेष निगरानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्विलांस टीम के साथ मिलकर स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे बच्चों को चिह्नित करने में जुट गया है, जो एमआर-वन व टू टीके से छूट गए हैं। टीकाकरण के साथ-साथ उन बच्चों पर भी नजर रखी जाएगी, जिनमें खसरे के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके लिए सोमवार को जिला स्तरीय टीम ने सादाबाद में एमओईसी, सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर्स व एएनएम के साथ बैठक की तथा बच्चों को चिह्नित करने को बनाई गई रणनीति के बारे में बताया।
इनका कहना है
एमएमआर टीकाकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे खसरे आदि की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके। इसके लिए टीम एक्टिव की गई हैं। बच्चों पर नजर रखी जा रही है। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि लक्षण दिखते ही वे स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें।
-डाॅ. एमआई आलम, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी