फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नया जोश और नई रवानी, फिर से दम पकड़ रही है कहानी

विज्ञापन
विज्ञापन
दीपक शर्मा
विज्ञापन

पिछले कुछ दशकों में कहानी कहने और सुनने की कमजोर पड़ रही कला एक बार फिर से नया जीवन पा रही है। कहानी को पुनर्जीवित करने में अलीगढ़ के साथ-साथ लखनऊ, फैजाबाद, दिल्ली और रामपुर के क्षेत्रों की अहम भूमिका है।
इस संबंध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की अंग्रेजी विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर समीना खान ने एक शोध पत्र तैयार किया है। इस शोधपत्र को उन्होंने राजस्थान के उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भी प्रस्तुत किया। जल्द ही प्रोफेसर समीना खान का यह शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन का हिस्सा बनने वाला है। प्रोफेसर समीना कहती हैं कि कहानी सुनाना कहानी कहने का एक पारंपरिक रूप है। जिसमें विशिष्ट लहजे, अभिव्यक्ति की शैली, चेहरे के भाव और अभिनय कौशल जीवन का निर्माण करते हैं और दर्शकों को प्रभावित करते हैं।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि यह कथाकार और सुनने वालों के बीच संबंध बनाता है। प्रोफेसर समीना ने कहा कि उन्नीसवीं सदी में यह कला धीरे-धीरे कमजोर हो गई, लेकिन उत्तर भारतीय कहानी कहने की इन परंपराओं को अब मजबूती मिली है। दिल्ली, अलीगढ़, लखनऊ, फैजाबाद और रामपुर आदि ने एक बार फिर कहानी को पुनर्जीवित किया है। इन क्षेत्रों में आयोजनों के साथ कहानी को कहने की परंपरा को कायम रखा गया। इसके अलावा रेडियो व अन्य संचार माध्यमों ने भी कहानी कहने की कला को मजबूत किया।
क्या कारण रहे कहानी के पुनर्जीवित होने के
अलीगढ़। प्रोफेसर समीना खान कहती हैं कि वह शहर या इलाके जो नवाबों और पुरानी रियासतों के अधीन रहे वहां पर कहानी और कहानी कारों को संरक्षण दिए जाने का काम बखूबी हुआ। यह काम हैदराबाद और दक्षिण भारत में भी हुआ, लेकिन उत्तर भारत के इन इलाकों में उल्लेखनीय और प्रमुख रूप से यह कार्य हुआ। शोध में इसी का विस्तार से अध्ययन किया गया।
एएमयू के प्रोफेसर काजी सत्तार थे मशहूर कहानीकार
अलीगढ़। कहानी के क्षेत्र में अलीगढ़ की जमीन से बहुत ही महत्वपूर्ण काम हुआ। इस्मत चुगताई से लेकर काजी अब्दुल सत्तार तक बड़े-बड़े नाम कहानी कारों की फेहरिस्त में शामिल रहे। इनमें एक बड़ा नाम जैनेंद्र का भी है जिनका जन्म अलीगढ़ के कौड़ियागंज में हुआ।
विज्ञापन

मानव सभ्यता के साथ कहानी का भी अस्तित्व सामने आया। वीरों की, राजाओं की, समाज के विभिन्न नायक और खलनायकों के चरित्र का चित्रण करती कहानियां अभी भी सुनने को मिल जाती हैं। यह ऐसी जटिल विधा है जो अभिव्यक्ति में उतनी ही सहज है। यह ज्ञान और शिक्षा के प्रदान किए जाने का एक माध्यम भी है।
-प्रोफेसर शाफे किदवई, साहित्य एकेडमी पुरस्कार विजेता लेखक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें