राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष डा. निजामुद्दीन खान का कहना है कि आजम खां के बयानों से मुसलमान शर्मिंदा हो रहे हैं।
वहीं कोर्ट के फैसलों ने कई बार यह साबित किया है कि देश में अमीरों के लिए अलग कानून है और गरीब के लिए अलग। खान ने प्रदेश सरकार को ही दादरी कांड के लिए जिम्मेदार बताया है।
उन्होंने केंद्र सरकार को भी गलत रिपोर्ट भेजने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि इकलाख की हत्या का जो वास्तविक कारण है, केंद्र सरकार को नहीं बताया गया है।
उन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद पर टिप्पणी करने वाले हिंदू महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश तिवारी पर एनएसए के तहत कार्रवाई की मांग की है।
शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में डा. निजामुद्दीन ने प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संघ पर प्रतिबंध की मांग कर मुसलमानों को बेवकूफ बना रहे हैं।
उनके राज में महंत, साध्वी और सांसद भड़काऊ बयान दे रहे हैं। आजम यूपी में नंबर टू हैं। उनको चाहिए कि वह सूबे में संघ पर प्रतिबंध लगाएं।
देश में प्रतिबंधित करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पास कराकर केंद्र को भेजें। आजम खां अनर्गल और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले बयान देना बंद करें। इससे मुसलमानों का सिर शर्म से झुकता है।
किसान मर रहे हैं, प्रदेश जल रहा है और समाजवादी सरकार सरकारी पैसे से जश्न मना रही है। कानून व्यवस्था से लेकर बिजली-पानी तक को जनता तरस रही है। असहिष्णुता के सवाल पर उनका कहना था कि यह यकायक पैदा नहीं हुई।
देश में इसकी जिम्मेदार तमाम सेकूलर पार्टियां हैं। संघ ही नहीं समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और खुद को सेकुलर कहने वाली अन्य पार्टियां भी तनाव का माहौल बना रहने देना चाहती हैं ताकि मुसलमान भय से उनको वोट दे।