पांच फरवरी 2018 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में पकौड़े बेचने को स्वरोजगार बताया था। 25 मार्च 2020 से पूरे देश में लॉकडाउन जारी है और गुजरे दो महीने में हजारों चाट पकौड़े वाले भुखमरी की कगार पर पहुंच गए। अब उनके पास खुद का पेट भरने को कुछ नहीं है। बीस लाख करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि से कई राहत पैकेज का एलान करने के आखिरी दौर में सरकार को इन पकौड़े वालों की याद आ ही गई है। केंद्र सरकार ने पांच हजार करोड़ रुपये का प्रावधान कर दिया है।
राज्य सरकार ने जिला प्रशासन के माध्यम से ऐसे लोगों की सूची तलब की है ताकि इनको जल्द से जल्द दस हजार रुपये की मदद दी जा सके। इन सभी छोटे कामगारों को एक से डेढ़ महीने के अंदर ही कैपिटल मनी के रूप में 10 हजार रुपये का लोन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वो दोबारा से अपना काम कर सके। इस योजना का लाभ डिजिटल पेंमेंट के माध्यम से दिया जाएगा।
इसलिए वेंडरों का चिन्हांकन कराया जाएगा। इन सभी का बैंक डिटेल, पहचान पत्र, केवाईसी आदि मानक पूरे किए जाएंगे। योजना का लाभ वेंडरों को दिलाने और उनकी रिपोर्ट संकलन का कार्य डूडा को सौंपा गया है। कहने को ये रकम बहुत छोटी है लेकिन ठेल ढकेल वालों को इससे बड़ी राहत मिल सकेगी।
लीड बैंक मैनेजर रविंद्र प्रसाद ने बताया कि योजना से संबंधित दिशा-निर्देश का इंतजार है। दिशा-निर्देश आते ही बैंकों के माध्यम से लागू कराया जाएगा। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी को पत्र लिख कर डूडा और नगर निगम के माध्यम से इस योजना के अपेक्षित लाभार्थियों का ब्योरा मांगा है।
इससे पूड़ी-कचौड़ी-खस्ता, चाट-पानी का बताशा, वेज-नानवेज मोमोज, वेज-नानवेज बिरयानी, नानवेज, अंडा, चाय-नाश्ता, लस्सी, ठंडा पेय, सब्जी, फल, पंचर, पान-पान मसाला, फूल सहित आदि कई तरह के काम करने वाले वेंडरों को राहत मिल सकेगी।