जालौन पुलिस मजदूर की जिस बेटी की गुमशुदगी और हत्या के मुकदमे को भुलाए बैठी थी, उस कहानी को एक डाकिये ने चिट्ठी के सहारे सुलझा दिया है। 11 साल की उम्र में माता-पिता से बिछड़ी जावित्री उर्फ अनीता ने पिछले दिनों छर्रा से एक चिट्ठी जालौन के लिए पोस्ट की थी। डाकिये ने सिर्फ नाम के सहारे जालौन के कस्बा कालपी में जावित्री के माता-पिता को खोज निकाला और चिट्ठी पहुंचा दी। सोमवार को जावित्री के माता पिता व जालौन पुलिस के दरोगा रवि प्रकाश मिश्रा के साथ छर्रा आकर जावित्री को अपने साथ जालौन ले गए। उधर, जावित्री की अपहरण व हत्या के मुकदमे में जालौन में 10 नामजद लोग जमानत पर हैं।
दिल्ली में बिछड़कर ऐसे छर्रा पहुंची जावित्री
जालौन के कालपी थाना क्षेत्र के गांव खेरई निवासी रामप्रकाश अहिरवार की 11 वर्षीय बेटी जावित्री वर्ष 2007 में मां राजो देवी, पिता, भाई जयकिशोर, अजय, नंद किशोर व राहुल के साथ दिल्ली में एक धार्मिक आयोजन में पहुंची थी। वहां अपने माता-पिता से बिछड़ गई। उसी दौरान जावित्री दिल्ली में तिलकनगर निवासी एक महिला को मिल गई। उस महिला ने जावित्री को संभाला। महिला ने जावित्री को नया नाम अनीता दिया। अनीता उर्फ जावित्री उस महिला को बुआ कहकर संबोधित करने लगी। करीब 6-7 वर्ष पहले छर्रा के कमालाबाद निवासी वीरेंद्र दिल्ली में राजमिस्त्री का काम करने पहुंचे, जहां उसकी जावित्री से मुलाकात हुई और दोनों की सहमति देख मुंह बोली बुआ ने दोनों की शादी करवा दी। तब से जावित्री छर्रा में अपने पति के साथ रह रही है। दंपती के तीन बच्चे क्रमश: 5 साल का बेटा, तीन व एक साल की बेटियां हैं। मगर जावित्री आज तक अपने मां-पिता व भाइयों को न भूल पाई और गाहे-बगाहे चर्चा करती रहती थी।
छर्रा इंस्पेक्टर ने दिया चिट्ठी भेजने का सुझाव तो मिली सफलता
जावित्री के पति वीरेंद्र पुत्र रामवीर पिछले दिनों छर्रा के डॉ. श्रीनिवास के यहां राजमिस्त्री का काम कर रहे थे। तभी डॉक्टर के भतीजे से उसने अपनी पत्नी अनीता उर्फ जावित्री की घटना साझा की। इसके बाद ही जावित्री की कहानी सुखद मुकाम तक पहुंची। डॉक्टर के भतीजे ने जावित्री की मुलाकात इंस्पेक्टर छर्रा रामसिया मौर्य से मुलाकात कराई। इंस्पेक्टर ने ही जावित्री को याद सूचनाओं के आधार पर चिट्ठी का नुस्खा आजमाने की सलाह दी थी। जावित्री को अपना स्कूल, माता-पिता व भाई बहनों के नाम तो याद थे पर पता याद नहीं था। कस्बा कालपी जालौन पते पर ही चिट्ठी भेजी गई। संपर्क के लिए चिट्ठी में इंस्पेक्टर छर्रा का ही नंबर डाला गया था।
चिट्ठी लेकर छर्रा आए माता-पिता
पुलिस के मुताबिक जावित्री की मां राजो देवी पत्नी रामप्रकाश को जैसे ही चिट्ठी मिली वो हैरत में पड़ गईं। जिस बेटी की हत्या का 12 साल से मुकदमा चल रहा है और 10 नामजद लोग जमानत पर हैं, उसी बेटी की चिट्ठी आ गई। उन्होंने खुद को संभाला और ये खबर स्थानीय पुलिस को दी। वहां के दरोगा रवि प्रकाश मिश्रा ने चिट्ठी में दिए छर्रा इंस्पेक्टर के नंबर पर बात की। तब जाकर दरोगा सहित जावित्री के माता-पिता सोमवार को छर्रा इंस्पेक्टर से मिले। इंस्पेक्टर ने जावित्री को बुलवाकर मुलाकात कराई। मुलाकात का दृश्य देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। फिलहाल जावित्री के माता-पिता अपनी बेटी, दामाद व तीनों बच्चों को साथ ले गए हैं।
सीबीसीआईडी तक पहुंची जावित्री की हत्या की जांच
जावित्री के माता-पिता ने 2008 में जालौन के कालपी थाने में बहलाकर जावित्री को ले जाने का मुकदमा अपराध संख्या 270/2008 दस लोगों पर नामजद दर्ज कराया था। पुलिस ने हत्या व साक्ष्य मिटाने की धाराएं बढ़ा दीं, मगर जावित्री को नहीं तलाश पाई। 3 मार्च 2009 को सीबीसीआईडी को जांच दे दी गई। 10 नामजद लोगों ने इस मुकदमे में जमानत तक कराई। अलीगढ़ में जावित्री के मिलने के बाद जब जालौन के कालपी थाना प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पुराना प्रकरण है। फाइल निकलवाकर जानकारी करेंगे और आगे की कार्यवाही करेंगे। इधर, इंस्पेक्टर छर्रा रामसिया मौर्य के अनुसार युवती व उसके पति को जालौन से आए परिवार वाले साथ ले गए हैं। संभवत: वहां न्यायालय में बयान आदि कराए जाने की औपचारिकताएं पूरी होंगी।