कोविड की दो वर्ष की मार के बाद आर्टवेयर इंडस्ट्री एक बार फिर दीपावली - क्रिसमस के लिए तैयार हो रही है। विदेशों से ऑर्डर मिलने लगे हैं और निर्यातकों के चेहरे भी खिल उठे हैं। हालांकि उन्हें कच्चे माल की कीमतें परेशान कर रही हैं। मगर ऑर्डर मिलने और वायर से वायदा होने के कारण निर्यातक ऑर्डर तैयार करने में जुटे हैं। अभी तक के अनुमान के अनुसार इन दोनों त्योहारों पर 50 करोड़ से अधिक के निर्यात के संकेत मिले हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद अब दीपावली व क्रिसमस को लेकर आर्टवेयर इंडस्ट्री में लक्ष्मी - गणेश-सरस्वती और श्री राम दरबार की मूर्तियां बनना शुरू हो र्गइं हैं। साथ में प्रभू यीशू की मूर्ति, कैंडल स्टैंड व अन्य सजावटी आइटम क्रिसमस को लेकर बनने लगे हैं। ब्रास (कापर, पीतल व जस्ता मिक्स) निर्मित यहां अधिक बनती हैं। जिनकी अपनी एक पहचान है। जोकि अंदर से खोखली होती हैं बैल्डिंग के साथ बनाने की कला है। जिसमें कहीं जोड़ दिखाई नहीं देता। दक्षिण भारत में ठोस मूर्ति बनाई जाती हैं, जो वजनी और कीमती भी होती है। करीब तीन दर्जन निर्यातक अपने कारखानों में या मजदूरी पर मूर्ति ऑर्डर के अनुसार तैयार कराते हैं और उनकी फिनिंसिंग कराते हैं। शहर के सासनी गेट, जयगंज, सराय भूखी, भुजपुरा, पला रोड, बिहारी नगर व उनसे सटे आसपास के इलाकों में यह कुटीर उद्योग के रूप में है। इनकी किसी घर में ढलाई को किसी में पॉलिस तथा बैल्डिंग का काम मजदूरी पर होता है।
रूस यूक्रेन विवाद का नहीं दिख रहा असर
जिस तरह से बाजार में ऑर्डर आ रहे हैं, उसे लेकर रूस यूक्रेन विवाद का असर नहीं दिख रहा है। कारोबारी व निर्यातक एक ही बात कहते हैं कि वर्ष 2019 से पहले तक जो स्थिति थी, वह अभी तक तो नहीं है। दो वर्ष बाद जिस तरह से ऑर्डर मिलना शुरू हुआ है। उससे आने वाले समय में अच्छे संकेत मिले हैं। विदेशों में बसे भारतीयों को लेकर दीपावली पर ऑर्डर कुछ ज्यादा सामने आया है।
यहां तक सप्लाई
दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट, कर्नाटक के अलावा यूपी के कई शहरों में मूर्ति की आपूर्ति होती है। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी मूर्तियां बिक रही हैं। दुबई, कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस में रहने वाले भारतीयों और क्रिसमस पर उन देश
के लोगों के बीच इनकी मंाग है।
सालाना कारोबार एक नजर में
500 करोड़ रुपये सालाना है पीतल मूर्ति का कारोबार
150 करोड़ रुपये सालाना का है निर्यात
35 निर्यातक विदेशी बाजार में बेचते हैं पीतल मूर्ति
50 बड़े पीतल मूर्ति के हैं निर्माता
50 हजार लोगों की जुड़ी है रोजी रोटी
500 ढलाई भट्ठी व मेन्युफैक्चरिंग यूनिट
50 करोड़ रुपये का विदेशी बाजार से आर्डर का अनुमान
---मूर्तियों की कीमत---
-800 रुपये किलो तक से 1100 रुपये किलो तक
कच्चे माल की कीमत दे रही सिरदर्द
कोविड के बाद बाजार में इस बार पहली मर्तबा सुधार तो दिखाई दे रहा है। विदेशी ऑर्डर भी लगातार आ रहे हैं। वायर संपर्क कर रहे हैं। ऑर्डर भी बुक हो रहे हैं। मगर कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता निर्यातक तथा निर्माताओं को दिक्कत दे रही है। लगातार उतार चढ़ाव के चलते वे परेशान हैं। मगर वायर को बांधे रखने के लिए वे इस उतार चढ़ाव झेलने को तैयार हैं।
अपना बार कोड भेजकर सीधे मंगाते तैयार माल
विदेश में निर्यात होने वाली मूर्ति पर वायर अपना बार कोड लगाकर विदेशी बाजार में बेचता है। दूसरे देशों में मजदूरी बहुत ज्यादा लगती है। इसलिए यहां से पूरी तरह तैयार व बार कोड सहित मूर्ति भेजी जाती है। बस वहां पैकिंग खोलकर उसे शोरूम में सजाकर भेजा जाता है। वायर खुद अपना बार कोड भेजते हैं।
-दीपावली व क्रिसमस को लेकर विदेशी निर्यात के अच्छे संकेत मिल रहे हैं। ऑर्डर आने लगे हैं। दो वर्ष की काम बंदी से इस बार कुछ उबरने की उम्मीद है। वर्ष 2018-19 तक जो टर्नओवर था, उसका 50 फीसदी ऑर्डर अभी तक मिल चुका है।-सुशील मित्तल, निर्माता/निर्यातक
-हमारे यहां ब्रास की चादर, सिल्ली दोनों का माल बनता है। इनकी मांग देश विदेश में है। त्योहार पर सामान्य से काफी अधिक मांग रहती है। दो वर्ष के ब्रेक के बाद यह राहत भरी खबर है। मगर कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता परेशान कर रही है।- कोमल कटारा, निर्माता/निर्यातक