कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सभी केंद्रीय और राज्यों के मेडिकल कॉलेज में ओबीसी श्रेणी को आरक्षण देने की मांग के बाद एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में आरक्षण की स्थिति पर एक बार फिर से चर्चा हो रही है। यहां पर किसी भी प्रकार का जातिगत आरक्षण लागू नहीं है। इसके लिए विश्वविद्यालय अपनी स्वायत्तता और अल्पसंख्यक दर्जे की दलील देता है। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि अखिल भारतीय कोटा के तहत सभी केंद्रीय और प्रदेश के मेडिकल शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए क्रमश: 15 ,7.5 और 10 फ़ीसदी सीट आरक्षित होती हैं।
उन्होंने मांग की है कि ओबीसी को आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के जरिए मेडिकल संस्थानों में होने वाले दलों में छात्रों को आरक्षण की सुविधा नहीं मिल पा रही। इस प्रकरण पर भाजपा के जिला प्रवक्ता और स्वयं एएमयू में मेडिकल की पढ़ाई कर चुके डॉ. निशित शर्मा कहते हैं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अंदर सरकार की आरक्षण की कोई भी नीति लागू नहीं है। यह बहुत विरोधाभासी स्थिति है कि भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदत्त व्यवस्था को यहां पर प्रवेश प्रणाली में लागू नहीं किया गया है। समय-समय पर यह मांग उठाई गई है। लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया है।
इस पूरे मामले पर एएमयू जनसंपर्क विभाग के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई कहते हैं मूल रूप से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक अल्पसंख्यक संस्थान है। यह बात इसकी स्थापना के समय ही साफ हो गई थी। 100 साल के विश्वविद्यालय के सफर में कई तरह की चुनौतियां आईं और विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर अदालतों में चुनौती दी गई। अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय की व्यवस्था है कि जब तक कोई अंतिम फैसला न आ जाए तब तक यथा स्थिति रखी जाए। हम उसी का पालन कर रहे हैं।