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.. सलामत रहे ये घर.. ये घराना

Mon, 18 Apr 2016 01:49 AM IST
मनाोज माहेश्वरी
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घराना
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परिवार में एका रहे और प्यार की गंगा बहे..। हाथरस शहर के नवींपुर मोहल्ले की 71 वर्षीय सेवानिवृत शिक्षिका मीरा कौशिक इसी मकसद को पाने के प्रयास में लगी रहती हैं। इस काम में उन्होंने कभी अपनी बढ़ती उम्र को हावी नहीं होने दिया। वह शिक्षिका काल से इस काम में जुटी हैं। अंतर इतना  है कि अब पुलिस के परिवार परामर्श केंद्र और अदालत के सुलह समझौता केंद्र के सदस्य के तौर पर काम कर रही हैं। इन केंद्रों से मिलने वाली पारिश्रमिक भी वह गरीब परिवारों पर खर्च कर देती हैं। मीरा कहतीं हैं--उनके प्रयासों से जब कोई परिवार एकजुट होता है तो उन्हें बेहद खुशी होेती है।
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 मीरा कौशिक जब शिक्षिका थीं उस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर परिवारके घरेलू हिंसा का गहरा असर देखा था। बच्चे स्कूल आते तो तनावग्रस्त रहते थे। बच्चों से बातने पर पता चलता कि वे अपने घर के माहौल को लेकर बेहद परेशान हैं। इसके बाद वह बच्चाें के अभिभावकों को बुलाती या खुद संपर्क  करती और उन्हें समझातीं। फिर झगड़े का निपटरा कराती थीं। बाद में यह सिलसिला उनके कर्मों में शामिल हो गया। तब से जारी सिलसिला आज भी चल रहा है।
मीरा का जन्म कानपुर में हुआ है। वह शिक्षक के तौर पर कानपुर, अलीगढ़ और हाथरस में लंबे समय तक कार्य कर चुकी हैंा। वह लंबे समय तक कई जनपदों में जीजीआईसी की प्रधानाचार्य भी रही हैं। एक दशक पहले उधम सिंह नगर से जिला शिक्षा अधिकारी पद से रिटायर र्हुइं। इसके बाद हाथरस में रहने लगीं। उसके बाद से परिवारिक झगड़ों का निपटाने और घरेलू हिंसा को शंत कराने में निरंतर लगी हैं। उनके कार्य को देखते हुए पुलिस ने पहले परिवार परामर्श केंद्र और फिर कोर्ट के सुलह समझौता केंद्र से जोड़  दिया गया। वर्तमान में वह दोनों  केंद्रों की एकमात्र महिला सदस्य हैं।
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इन केंद्रों पर घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, भरण पोषण वाद आदि निपटाए आते हैं।उन्हाेंने कहा कि अपने सहयोगियों के साथ तयशुदा तारीख पर दोनों पक्षों को बुलकर शिक्षिका की तरह समझाती हैं। हर संभव उनके दांपत्य जीवन को बचाने का प्रयास किया जाता है। संतान वाले शादीशुदा जोड़े को यह समझाने का प्रयास करती हैं कि यदि दोनों अलग हुए तो बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा। वह दोेनों पक्षों को कार्यालय बुलाकर भी समझाती हैं।
 उनके दावों को मानें तो अब तक वह लगभग 300 मामलों को निपटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। इस सिलसिले में उन्हें थाने-कोर्ट तक जाना पड़ गयां। मीरा का कहना है कि जब उनके प्रयास से कोई परिवार प्यार के धागे में बंध जाता है तो उस दिन उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता।
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