जिले में स्वाइन फ्लू का पहला मामला प्रकाश में आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्वाइन फ्लू से पीड़ित महिला को विष्णुपुरी स्थित नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर आ गया है। जिला अस्पताल और दीन दयाल अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच को लेकर व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वाइन फ्लू के लिए अलग वार्ड बनाने और इसकी एक मात्र दवा टैमीफ्लू की पर्याप्त मात्रा रखने को कहा गया है।
नौरंगाबाद छावनी निवासी रमेश की पत्नी शांति देवी (40) की पिछले दिनों तबियत खराब हुई। उन्हें तेज बुखार के साथ सांस फूलने की शिकायत हुई थी। डाक्टरों के इलाज से कोई लाभ न होते देख परिजन शांति देवी को विष्णुपुरी स्थित एक नर्सिंग होम में लाए। यहां जांच कराई गई तो फेफड़ों, गुर्दों और लीवर तक स्वाइन फ्लू का असर देखा गया। डॉ. संजय भार्गव के नेतृत्व में शांति देवी का इलाज शुरू हुआ। डॉ. संजय भार्गव ने बताया कि शांति देवी को टैमी फ्लू की दवा दी गई है। महिला की तबियत में सुधार हो रहा है और हालत खतरे से बाहर है।
गठित की एपिडेमिक टीम
सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया गठित एपिडेमिक टीमें गुरुवार को शहर के विभिन्न इलाकों में जाएंगी। एक टीम स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मरीज के पास भी जाएगी। इस बात की जांच होगी कि वह एलिटा कैटेगरी का है या कार्टेस्ट श्रेणी का है। अगर वह स्वाइन फ्लू का मरीज है, तो आइसोलेशन उपलब्ध कराया जाएगा।
डीडी में कर्मियों को लगवाए टीके
दीन दयाल अस्पताल में पहले ही स्वास्थ्य कर्मियों को स्वाइन फ्लू से बचाव का टीका लगा दिया गया है। स्वाइन फ्लू की दवा टैमी फ्लू का स्टाक भी रखा गया है।
कैसे बचा जा सकता है
अच्छी किस्म का मास्क पहनकर इससे बचा जा सकता है। इसके अलावा वातावरण को साफ सुथरा रखकर भी बचा जा सकता है।
क्या है स्वाइन फ्लू
यह सुअरों से मनुष्यों में फैलता है। हवा में रहकर सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। यह सबसे पहले व्यक्ति के फेफड़ों पर अटैक करता है। जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है और फेफड़ों में सूजन आ जाती है।
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। जिला अस्पताल और डीडी अस्पताल सहित जिले की सीएचसी आदि के लिए निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी मरीज अगर स्वाइन फ्लू के लक्षणों जैसा आता है तो सूचित करें। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग मास्क आदि की व्यवस्था भी कर रहा है। स्वाइन फ्लू के लिए अस्पतालों में अलग से वार्ड बनाए गए हैं।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ