स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे पल्स पोलियो अभियान में कुछ स्थानों पर बंद कर दी गई पोलियो की ट्राइवैलेंट दवा का इस्तेमाल किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। जबकि इस दवा का प्रयोग बंद कर दिये जाने के निर्देश विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिए थे क्योंकि पी टू किस्म का वायरस अब नहीं रहा है।
इस पूरे मामले की पल्स पोलियो पर्यवेक्षक त्रिलोकी नाथ गौड़ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को जानकारी दी है। जल्द ही वह दिल्ली जाकर इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपेंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को दी गई जानकारी में कहा है कि अलीगढ़ में पल्स पोलियो अभियान बेहद रस्मन तरीके से चलाया जा रहा है। यहां पर वैक्सीनेटरों को ट्राइवैलेंट वैक्सीन ही दे दी जा रही है। जिसका होना य न होना बराबर है। इसकी जगह वाईवैलेंट दवा दी जानी चाहिए।
क्योंकि अब पोलियो के लिए जंग पीवन और पू थ्री वायरस से है। त्रिलोकी नाथ गौड़ ने कहा है कि कुछ स्थानों पर वैक्सीनेटरों को दवा के विषय में बता ही नहीं है। कुछ वैक्सीनेटरों को एप्रिन तक नहीं दी जाती है जिससे वह जनता के बीच पहचाने ही नहीं जाते हैं। इससे बेहद असहज स्थिति पैदा हो जाती है। इसके अलावा कुछ वैक्सीनेटरों को तो मानदेय तक नहीं मिला है। ऐेसी स्थिति में उनका काम करना बेहद मुश्किल हो रहा है।