एक तरफ एसिड अटैक की बढ़ी घटनाओं को लेकर हायतौबा मची हुई है। रोज सख्ती की तो बात हो ही रही है। साथ में इसकी बिक्री पर भी बहस छिड़ी हुई है।
इसी शोरगुल के बीच नियम बना हुआ है कि तेजाब बेचने वाले खरीदारों का पूरा ब्योरा पहचान पत्र के साथ रखेंगे। मगर अपने शहर में इस नियम की अनदेखी की जा रही है। आलम यह है कि कोई भी किसी भी दुकान से और गली-मोहल्लों में फेरी लगाकर बेचने वालों से बिना किसी पहचान पत्र और रजिस्टर एंट्री के तेजाब खरीद सकता है।
महानगर के पुराने शहर की कुछ दुकानों पर रविवार दोपहर अमर उजाला ने जब इस संबंध में हकीकत जानने की कोशिश की तो एक व्यक्ति को प्लास्टिक की कट्टी में बिना किसी रजिस्टर एंट्री और पहचान पत्र लिए तेजाब दे दिया गया। यह हाल किसी एक दुकान का नहीं, बल्कि अधिकतर दुकानों की स्थिति कुछ ऐसी ही है।
आम ग्राहक के लिए कोई नियम कायदा कानून नहीं है। अगर कानून का कोई जानकार व्यक्ति सामान्य तौर पर किसी विशेष जरूरत पर तेजाब लेने पहुंच जाए तो उसे दुकानदार के स्तर से तमाम कानून समझा दिए जाएंगे।
इसी तरह महानगर की कॉलोनियों में साइकिल पर फेरी लगाकर तेजाब बेचने वाले भी लोगों को खुलेआम बिना किसी एंट्री या रिकार्ड के तेजाब बेचते फिर रहे हैं। उन पर भी किसी का ध्यान नहीं है।
इसे लेकर एक साल पहले बने नियम के विषय में बता दें कि दुकानदार ग्राहक का रिकार्ड दर्ज करने के लिए एक रजिस्टर बनाएंगे। जिसमें बाकायदा ग्राहक का नाम पता, उसके पहचान पत्र की फोटो प्रति के साथ दर्ज किया जाएगा।
तेजाब खरीदने की वजह भी लिखी जाएगी। पाक्षिक रूप से एसडीएम स्तर के अधिकारी दुकानों पर जाकर उनके रजिस्टर का सत्यापन करेंगे। उनकी खरीद-बिक्री का भी पूरा ब्योरा देखा जाएगा। इसमें कमी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।