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अलीगढ़ : शहर नहीं है साफ, सर्वेक्षण पर कैसे करें विश्वास

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विधायक अनिल पाराशर के कैंप कार्यालय का मार्ग, जहां नाले की सफाई नहीं हुई। - फोटो : CITY OFFICE
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स्वच्छ सर्वेक्षण-2020 में भले ही अलीगढ़ ने देश में 30वां और प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर वाहवाही लूटी हो लेकिन शहर के लोगों और प्रबुद्ध वर्ग ने इस रैंकिंग को अलीगढ़ के लोगों के साथ मजाक बताया है। उनका कहना है कि नाले चोक हैं, नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। कई कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठाया जाता है। ऐसे में इस सर्वेक्षण पर कैसे विश्वास किया जा सकता है। सर्वेक्षण को फर्जी करार देते हुए फिरदौस नगर, बेगपुर, सर सैयद नगर आदि कॉलोनियों के लोगों ने नाराजगी भी व्यक्त की है।
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वहीं, सर सैयद नगर में रिहायशी आबादी के बीच कूड़ा डंपिंग यार्ड बनाए जाने को लेकर शुक्रवार को जेएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन आरिफ सिद्दीकी, पूर्व प्रिंसिपल प्रोफेसर अशरफ मलिक ने अन्य लोगों के साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मुलाकात की। इन लोगों का कहना है कि आबादी के बीच पूरे शहर का कूड़ा डंप होने से यहां पर संक्रामक रोग फैलने की पूरी आशंका है। इसलिए इसके निर्माण को तत्काल रोका जाए।
10 साल में ड्रेनेज सिस्टम तबाह
फिरदौस नगर बी के रहने वाले कांग्रेस नेता अहमर अली का कहना है कि यह जनता के साथ धोखा है। पिछले 10 साल में शहर का ड्रेनेज सिस्टम बुरी तरह ध्वस्त हो चुका है। क्वार्सी बाईपास, अनूपशहर रोड, धौर्रा आदि के इलाके में 40 फ़ीसदी क्षेत्र ऐसा है, जहां नालियां तक नहीं बनी हैं। लोगों ने स्वयं ही पानी निकासी इधर-उधर कर रखी है। ऐसे में किस आधार पर स्वच्छ सर्वेक्षण-2020 में अलीगढ़ को तीसरा स्थान दिया गया है। यह उपहास पूर्ण स्थिति है।
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दम तोड़ गई डोर टू डोर कूड़ा उठाने की योजना
बेगपुर कॉलोनी निवासी महेश चंद शर्मा ने नगर निगम पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर शहर में संक्रामक रोग फैलाने की स्थिति पैदा कर रहा है। शहर में विभिन्न स्थानों पर सड़कों पर बनाई गई कूड़ा डंपिंग इस बात की गवाही दे रहे हैं। डोर टू डोर कूड़ा उठाने की योजना ध्वस्त हो चुकी है। जबकि कूड़े के नाम पर यूजर चार्ज घरेलू और व्यवसायिक दोनों वसूले जा रहे हैं। इसके बाद भी शहर की सड़कों पर कूड़ा दिखना सवाल खड़े करता है।
शहर में कूड़ा और उसके निस्तारण की स्थिति (अनुमानित)
- 450 टन कूड़ा प्रतिदिन शहर में उत्पादित होता है
- 750 रुपये प्रति टन के हिसाब से एटूजेड को भुगतान होता है
- 12 करोड़ 15 लाख रुपये सालाना भुगतान होता है एटूजेड को
- 120000 कुल भवन शहर में हैं
- 104000 आवासीय भवन नगर निगम की सीमा में हैं
- 16000 अनावासीय भवन नगर निगम की सीमा में हैं
- 2200 से अधिक सफाई कर्मचारी नगर निगम के सफाई व्यवस्था में लगे हैं
- 100 से अधिक छोटे-बड़े वाहन नगर निगम के खुद के हैं, जो साफ-सफाई में लगे हैं (स्वीपिंग मशीन, टेंपो, ट्रैवलर हाईप्रेशर जेट मशीन आदि शामिल हैं)
- 40 करोड़ रुपये से अधिक नगर निगम अपने सफाई वाहनों के रखरखाव, ईंधन, चालक, उपकरण आदि पर प्रतिवर्ष खर्च करता है।
- 25 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के आसपास नगर निगम गृहकर से वसूल करता है, इसमें अब यूजर चार्ज भी शामिल हैं।
नगर निगम में डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था शुरू की गई थी। इस व्यवस्था में कुछ समस्याएं आईं लेकिन अब नगर निगम भविष्य में इसी व्यवस्था पर पूरा फोकस कर रहा है और जल्द ही इसको गंभीरता के साथ शहर के प्रत्येक स्वच्छता वार्ड में लागू कर दिया जाएगा। इसका परिणाम यह होगा कि सड़कों पर कूड़े के ढेर दिखाई नहीं देंगे। क्योंकि कूड़ाघर से एकत्र होने के बाद सीधे निस्तारित स्थल तक पहुंचेगा।
- अजीत कुमार राय, कर अधीक्षक, नगर निगम
स्वीडन की कंपनी को 7.50 एकड़ जमीन एक रुपये प्रतिमाह किराये पर दी
नगर निगम ने स्वीडन की एक कंपनी को वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने के लिए 7.50 एकड़ जमीन मथुरा रोड पर दी है। 29 साल के लिए यह जमीन मात्र एक रुपये प्रतिमाह की दर पर कंपनी को दी गई है। योजना यह है कि कूड़े से बिजली बनाई जाए और फिर इस बिजली को पावर कारपोरेशन को बेचा जाए। इससे पहले एटूजेड प्लांट को लेकर भी यही दावा किया गया था। लेकिन एटूजेड प्लांट से अभी तक बिजली का उत्पादन नहीं हुआ है। हालांकि, प्लांट मैनेजर समय सिंह वहां कूड़े से खाद बनाने का दावा जरूर करते हैं। एटूजेड प्लांट में बिजली क्यों नहीं बन रही है, इस विषय में तो कुछ नहीं कह सकता। लेकिन, इतना जरूर है कि यहां पर कूड़े से खाद जरूर बन रही है। प्लांट पूरी तरह चल रहा है।
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समय सिंह, प्लांट मैनेजर, एटूजेड कंपनी।

रामघाट रोड स्थित विधायक दलवीर सिंह घर की ओर जा रही मार्ग पर गंदगी।- फोटो : CITY OFFICE

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