बहरावद में खेत खुला छोड़ने पर गोभी उखाड़कर ले जाते ग्रामीण।
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जितनी गोभी चाहिए खेत से उखाड़ ले जाओ...। क्या करूंगा। आठ हजार रुपये प्रति बीघे के हिसाब से तीस बीघा खेत पट्टे पर लिया था। डेढ़ लाख रुपया लागत लगाकर गोभी तैयार की। दो ट्रक गोभी दिल्ली की मंडी में भेजे लेकिन ट्रकों का किराया तक नहीं निकला।
नोटबंदी के चलते खरीदार ही नहीं मिल रहे। खेत खाली कराना है। मजदूर लगाऊंगा तो मजदूरी अलग से देनी पड़ेगी। इसलिए कह दिया है कि जो जितना चाहे उतनी गोभी उनके खेत से उखाड़ ले जाए।
यह दर्द है भाजपा के अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम द्वारा गोद लिए गए आदर्श गांव बहरावद के किसान यज्ञपाल सिंह का। वह कहते हैं कभी सोचा नहीं था कि अचानक नोटबंदी होगी और गोभी का इतना बुरा हाल होगा।
जिस समय गोभी 25-30 रुपये किलो बिकने चाहिए वह मुफ्त में देने पर भी लोग नहीं ले जा रहे। यह सिर्फ एक किसान का नहीं बल्कि पूरे गांव का हाल है। नोटबंदी ने इन किसानों को तबाह कर दिया है। घर की जमापूंजी खर्च कर फसल तैयार की और वह भी डूब गई। दर्द बड़ा है पर नोटबंदी के फैसले से वह खुश हैं।
नोटबंदी की मार किसानों पर पड़ी है। बुआई के लिए खाद, बीज तक नहीं मिल रहा। किसान बेहद परेशान हैं। वैसे प्रधानमंत्री ने अच्छा काम किया है।
- नंदन सिंह
सांसद आज तक गांव में झांकने नहीं आए। विकास दूर किसानों का दर्द समझने तो आ जाते। हालांकि प्रधानमंत्री का फैसला स्वागत योग्य है।
- मेघ सिंह
आदर्श गांव तो तब हो जब नेताओं के पास दुख दर्द सुनने तक का वक्त हो। जनप्रतिनिधि कम से कम गोद लिए लोगों का दर्द तो सुन सकते हैं।
- सुखराम