‘योग और इस्लाम’ किताब ने खड़ा किया नया बखेड़ा
नासिर हुसैन
अलीगढ़। योग एक बार फिर विवादों से जुड़ गया है। नया बखेड़ा ‘योग और इस्लाम’ नाम की किताब से खड़ा हुआ है। किताब में अलिफ, लाम, मीम का मतलब ओउम् बताया गया है, जिस पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ऐतराज जताया है। इसके अलावा किताब में योग के बिना नमाज की कबूलियत पर ही सवाल खड़े किए जाने पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। किताब संघ से जुड़े संगठन ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ ने जारी की है।
योग दिवस से ठीक दो दिन पहले आरएसएस से जुड़े संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने योग और इस्लाम नाम से किताब जारी की है। किताब में शामिल तमाम जानकारियों को डॉ. इमरान चौधरी और अभिजीत सिंह ने संकलित किया है। किताब की परामर्श समिति में पद्मश्री प्रो. अख्तर उल वासे भी शामिल हैं। किताब के पेज नंबर 29 और 30 पर अलिफ, लाम और मीम का साफ-साफ मतलब ओउम् बताया गया है, जबकि मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि कुरान में इनके मायने नहीं बताए गए हैं। साथ ही पेज नंबर नौ पर तो यहां तक कहा गया है कि योग के बिना नमाज की कबूलियत संभव नहीं है। योग और नमाज के बीच सिर्फ नाम का अंतर बताया गया है। ओशो रजनीश के हवाले से पैगंबर मोहम्मद साहब को महान योगी बताया गया है। हिरा नाम की पहाड़ी पर जाकर ध्यान लगाने की भी बात कही गई है। सूफी परंपरा में सांस लेने के तरीके को भी योग से जोड़कर बताया गया है।