अलीगढ़ जिले की बरौली सीट अपनी अलग सियासी पहचान रखती है। दल और मुद्दों से अलग हटकर यहां सियासी योद्धाओं के अपने रसूख और वजूद पर चुनाव लड़े जाते रहे हैं। कमोबेश ऐसे ही हालात इस बार भी देखने को मिल रहे हैं। भाजपा ने मौजूदा विधायक ठा. दलवीर सिंह का टिकट काटकर उनके सियासी प्रतिद्वंद्वी ठा. जयवीर सिंह को मैदान में उतारा है। उन्हें चुनौती दे रहे रालोद-सपा के संयुक्त उम्मीदवार प्रमोद गौड़ का भी अपना सियासी कद है। अब विपक्ष जातीय गणित, क्षेत्र के मुद्दों को लेकर उन्हें घेरने में जुटा हुआ है। भितरघात के भी पूरे आसार बन रहे हैं। भाजपा नेता हेमवंत चौहान टिकट न मिलने पर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से मैदान में कूद पड़े। हालांकि,उनका पर्चा खारिज हो गया।
वोटों का गणित
85 हजार क्षत्रिय
50 हजार ब्राह्मण
50 हजार बघेल
40 हजार लोध
30 हजार मुस्लिम
40 हजार जाटव
25 हजार जाट
20 हजार वैश्य
2017 के नतीजे
दलवीर सिंह, भाजपा 1,25,545
जयवीर सिंह, बसपा 86,782
केशव सिंह बघेल, कांग्रेस 17,238
नीरज शर्मा, रालोद 1829
साथा मिल सबसे बड़ा मुद्दा, क्षमता बढ़ाने की दिशा में नहीं हुए प्रयास
पूर्व विधायक स्व. केशवदेव हरियाणा के पुत्र संजीव हरियाणा बताते हैं कि उनके पिताजी ने निर्दलीय विधायक बनने के बाद साथा मिल की स्थापना के लिए प्रयास किए। वे इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिले। प्रयास रंग लाया और फरवरी 1974 में जब इंदिरा गांधी कासिमपुर की सी यूनिट का शुभारंभ करने आईं तो उन्होंने साथा मिल का भी शिलान्यास किया।
करीब साढ़े पांच करोड़ की लागत से बनी इस मिल का 1977 में तत्कालीन सीएम नारायण दत्त तिवारी ने शुभारंभ किया था। क्षेत्र को रोजगार मिला। मगर, अब मलाल होता है कि मौजूदा जनप्रतिनिधि इस सियासी विरासत को संभाल नहीं पा रहे। हमें तो अब मुख्यमंत्री की घोषणा के साकार होने का इंतजार है। वहीं, वीरपुरा के कृष्णा ठाकुर भी ऐसे ही सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, साथा मिल की क्षमता बढ़ाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं हुए हैं।
कद्दावर चेहरों की वजह से वीआईपी सीट
मौजूदा विधायक ठा. दलवीर सिंह पूर्व की सरकारों में मंत्री भी रह चुके हैं। पिछले दो दशक से उनके सियासी प्रतिद्वंद्वी पूर्व मंत्री व एमएलसी ठा. जयवीर सिंह रहे हैं। जयवीर सिंह मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। अब वे भाजपा से मैदान में उतरे हैं। दलवीर व जयवीर के दौर से पहले इस सीट पर सुरेंद्र सिंह चौहान प्रदेश की सियासत में कद्दावर नेता रहे हैं। वे गृह मंत्री तक रहे।