एएमयू के असिस्टेंट प्रोफेसर और उनकी पत्नी के बीच चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आया है। महिला ने पति पर तीन तलाक देने का जो आरोप लगाया है, वह निराधार निकला है। कलक्ट्रेट स्थित वुमन प्रोटेक्शन सेल में सुनवाई के दौरान पति ने सुबूत पेश करते हुए कहा था कि उसने पत्नी को तलाक नहीं दिया। बल्कि, कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की है। कोर्ट से नोटिस जारी हुआ है।
वहीं, महिला जिन थीसिस और पासपोर्ट को जब्त करने का आरोप लगा रही थी, उसमें यह तय हुआ कि प्रोफेसर अपनी पत्नी की थीसिस निकलवाने और पासपोर्ट दोबारा जारी करवाने में आने वाला खर्च उठाएगा।
वुमन प्रोटेक्शन सेल की प्रभारी स्मृति गौतम ने बताया कि मामला सात जनवरी को प्रकाश में आया था। आठ जनवरी को दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया तो महिला ने पति पर मारपीट करने, तीन तलाक देने, घर से बाहर निकालने, फोन नंबर ब्लाक करने जैसे आरोप लगाए थे। इस संबंध में पति ने भी कई सुबूत पेश किए।
परिवार पर लगाए आरोपों के संबंध में बताया कि परिवार पश्चिम बंगाल में रहता है। घर से निकालने के आरोप पर बताया कि उसने खुद ही लड़ाई के चलते घर बदला था। दोनों पक्षों मेें कई बार की काउंसिलिंग के बाद भी समझौता न होने की स्थिति में तय किया गया कि पति द्वारा महिला की थीसिस व पासपोर्ट पुन: जारी कराने का खर्च उठाया जाएगा। इस बात पर असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपनी सहमति दे दी है।