फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

The Aligarh Bar Association: हंगामे के बीच चुनाव स्थगित, दूसरा खेमा चुनाव कराने पर अडिग

Sat, 14 Feb 2026 05:52 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

दि अलीगढ़ बार का दिसंबर में प्रस्तावित चुनाव, यूपी बार चुनाव के कारण टाला गया था। अब 18 फरवरी को चुनाव होना तय हुआ। जिसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई। नामांकन के बाद प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी गई।
विज्ञापन
दीवानी कचहरी में चुनाव को लेकर बैठक करते अधिवक्ता - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगढ़ जिले की प्रतिष्ठापूर्ण बार दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन का चुनाव शुक्रवार को बड़े विवाद का कारण बन गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के क्रम में 18 फरवरी को प्रस्तावित चुनाव टलने की चर्चा के बीच सुबह से ही दीवानी में हंगामा शुरू हो गया। चुनाव कराने पर अड़िग खेमे ने बार कार्यालय पर ताला डालकर सचिव को घेरकर अभद्रता का प्रयास किया। देर तक चुनाव कराए जाने की मांग को लेकर बार कार्यालय पर हंगामा होता रहा। इसी बीच चुनाव अधिकारी ने इस्तीफा भेज दिया। बार अध्यक्ष ने इसे स्वीकारते हुए चुनाव रद्द करने की घोषणा कर दी। मगर दूसरे खेमे ने सात वरिष्ठ वकीलों की कमेटी बनाकर 18 फरवरी को ही चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है।

विज्ञापन


घटनाक्रम के अनुसार दि अलीगढ़ बार का दिसंबर में प्रस्तावित चुनाव, यूपी बार चुनाव के कारण टाला गया था। अब 18 फरवरी को चुनाव होना तय हुआ। जिसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई। नामांकन के बाद प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी गई। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी निर्देश पर यूपी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से एक आदेश जिला जज द्वारा बृहस्पतिवार को बार अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह को दिया गया। जिसमें बार कार्यकारिणी में 30 फीसदी पद महिलाओं को आरक्षित करने व कोषाध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित करने की बात कही गई है। इस आदेश पर 16 फरवरी तब जवाब भी मांगा गया। इसे लेकर शुक्रवार को निर्णय होना था। इसी बीच शुक्रवार को यूपी बार की ओर से भी एक पत्र बार अध्यक्ष को मिला, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अमल के संबंध में 15 फरवरी तक रिपोर्ट मांगी गई। इसे देखते हुए बार अध्यक्ष ने चुनाव अधिकारी महान प्रताप सिंह से रिपोर्ट मांगी थी कि चुनाव कराया जाना चाहिए या नहीं।

शुक्रवार को चुनाव अधिकारी यह रिपोर्ट देते उससे पहले सुबह से चुनाव मैदान में खड़े प्रत्याशी, उनके समर्थक व तमाम अधिवक्ता बार कार्यालय पर एकत्रित हो गए। वे चुनाव कराने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। चुनाव न टालने की बात पर जोर देते हुए चुनाव अधिकारी व बार अध्यक्ष-सचिव को बुलाने लगे। इस बीच वहां बार सचिव दीपक बंसल के साथ-साथ सहायक चुनाव अधिकारी विपिन सिंह राणा व हरेंद्र सिंह पहुंच गए। हंगामा कर रहे कुछ अधिवक्ताओं ने सचिव दीपक बंसल को घेरकर अभद्रता का प्रयास किया। 

विज्ञापन

मगर सचिव द्वारा उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देकर शांत किया। इसके बाद बड़ी संख्या में चुनाव कराने के समर्थक अधिवक्ताओं ने एकत्रित होकर बार कार्यालय के बाहर बैठक की। जिसमें सात वरिष्ठ अधिवक्ताओं की कमेटी बनाकर जारी चुनाव प्रक्रिया के तहत 18 तारीख को ही चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। जिसका सर्वसम्मति से ऐलान किया गया। इस कमेटी में वरिष्ठ अधिवक्ता रामबाबू शर्मा, प्रमोद कुमार चौहान, राजकुमार यदुवंशी, चौ. मलखान सिंह, ठा. रामप्रताप सिंह, ठा. अमर सिंह यदुवंशी, संतोष कुमार वशिष्ठ को शामिल किया गया है। यह कमेटी अब चुनाव प्रक्रिया को पूरा कराएगी।

हम तो चुनाव करा ही रहे थे। हमारे स्तर से ही चुनाव प्रक्रिया घोषित की गई। उस प्रक्रिया पर काम भी शुरू हुआ। मगर बीच में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश जिला जज की ओर से प्राप्त हुआ। अब यूपी बार की ओर से भी पत्र प्राप्त हुआ। चूंकि यह अवमानना होगी। इसलिए निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव कराने में असमर्थता जताते हुए इस्तीफा दे दिया। अब अगर कोई चुनाव कराता है तो वह अवैध होगा। उसे शून्य माना जाएगा। एल्डर कमेटी के अलावा किसी अन्य कमेटी को इस तरह चुनाव कराने का हक नहीं है।-शैलेंद्र सिंह, बार अध्यक्ष
विज्ञापन

चुनाव अधिकारी का इस्तीफा, चुनाव हुआ तो अवैध माना जाएगा
हंगामे के बीच दोपहर में चुनाव अधिकारी महान प्रताप सिंह ने अपने पद से इस्तीफा बार अध्यक्ष को भेज दिया, जिसे स्वीकारते हुए बाद अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह ने यूपी बार काउंसिल आदि को सूचना भेज दी है। जिसमें कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के क्रम में निर्वाचन अधिकारी को अवगत कराया गया। उन्होंने नए नियमों से चुनाव कराने में असमर्थता जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

साथ में इस पत्र में बार कार्यालय पर दिन में हुए घटनाक्रम, एक कमेटी बनाकर चुनाव पुराने नियम से कराने के ऐलान का जिक्र करते हुए कहा है कि अब स्पष्ट करें कि किस तरह पुराने नियम से चुनाव कराया जाए। साथ में बार अध्यक्ष ने जिला जज को पत्र भेजकर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार ही चुनाव कराने के लिए विश्वास दिलाना चाहते हैं। इसके अलावा उन्होंने एक अन्य पत्र जारी किया है, जिसमें कहा है कि अगर कोई कमेटी या व्यक्ति 18 फरवरी को चुनाव कराता है तो वह अवैध माना जाएगा। साथ में जिन प्रत्याशियों ने नामांकन किया है, वे अपनी नामांकन फीस 16 फरवरी को बार कार्यालय से वापस ले सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें